नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट ने हाल ही में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी पर हमला करने के एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने शिकायतकर्ता की गवाही और इस तथ्य को भी आधार बनाया कि जांच अधिकारी (आईओ) ने शिकायतकर्ता की फटी हुई वर्दी जब्त नहीं की थी। यह मामला 2017 में राजौरी गार्डन थाने में दर्ज एक एफआईआर से संबंधित है। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट शशांक नंदन भट्ट ने शिकायतकर्ता एएसआई सतीश कुमार की तरफ से बताए गए बयान पर गंभीर संदेह जताते हुए आरोपी मंदीप सिंह को बरी कर दिया। आरोपी मंदीप सिंह को बरी करते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी और शिकायतकर्ता एक-दूसरे को नहीं जानते थे, लेकिन उनकी पहचान नहीं कराई गई थी। संवाद