नई दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2008 में सात साल की बच्ची की हत्या के मामले में आरोपी अनिल कुमार को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सका। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबरू भान ने आदेश में कहा कि अभियोजन द्वारा पेश की गई सामग्री उचित संदेह से परे अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। यह मामला 22 मार्च 2008 का है, जब दिल्ली के प्रेम विहार इलाके में सात साल की बच्ची का शव एक निर्माणाधीन इमारत में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने से दम घुटने को मौत का कारण बताया गया था। पुलिस ने अनिल कुमार को आरोपी बनाया था, जो उसी इलाके में रहता था। आरोप था कि बच्ची को आखिरी बार उसकी दुकान के पास देखा गया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि मामले में सारे सबूत केवल परिस्थितिजन्य थे और किसी भी गवाह ने यह नहीं कहा कि आरोपी का बच्ची या उसके परिवार से कोई झगड़ा था। अदालत ने यह भी कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में किसी यौन हमले के संकेत नहीं मिले। अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि लोधी रोड स्थित सीएफएसएल (केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) में कराए गए लाई-डिटेक्टर परीक्षण में आरोपी निर्दोष पाया गया। ब्यूरो