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compulsory attendance: सरकारी स्कूलों में 60 फीसदी हाजिरी अनिवार्य, अभिभावकों को मोबाइल पर भेजी जाएगी उपस्थिति

Sat, 03 Sep 2022 06:49 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

compulsory attendance : शिक्षा निदेशक हिमांशु गुप्ता ने कहा कि स्कूल प्रमुख इस बात को सुनिश्चित करें कि नौवीं से बारहवीं कक्षा के किसी भी छात्र की उपस्थिति 60 फीसदी से कम न हो।
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विस्तार
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दिल्ली सरकार ने अपने स्कूलों में उपस्थिति को सुधाने के लिए रणनीति तैयार की है। शिक्षा निदेशालय ने उपस्थिति की कैपिंग कर दी है। अब सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी कम से कम 60 फीसदी उपस्थिति होने पर ही परीक्षा में बैठ सकेंगे। अब तक हाजिरी को लेकर कोई बाध्यता नहीं थी। 

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यही नहीं, छात्रों की उपस्थिति अभिभावकों को दैनिक आधार पर फोन कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप, मेल से भेजी जाएगी। शिक्षक की ओर से ऑनलाइन जमा की गई विद्यार्थी की उपस्थिति उसके प्रदर्शन प्रोफाइल से जुड़ी होगी और अंतिम मानी जाएगी। बीते सप्ताह ही उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की कम उपस्थिति को लेकर सवाल उठाए थे। 

अब शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में उपस्थिति को सुधारने के लिए तैयार की गई रणनीति के संबंध में सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल प्रमुखों को आदेश जारी किया है। स्कूल प्रमुखों से कहा गया है कि वे नए आदेश के संबंध में विद्यार्थियों व अभिभावकों को जानकारी दें। 
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शिक्षा निदेशक हिमांशु गुप्ता ने कहा कि स्कूल प्रमुख इस बात को सुनिश्चित करें कि नौवीं से बारहवीं कक्षा के किसी भी छात्र की उपस्थिति 60 फीसदी से कम न हो। उपस्थिति कम होने पर उसे वार्षिक परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाए। उपस्थिति की गणना मिड टर्म परीक्षा से पहले की जाएगी। 

हाजिरी कम होने पर देना होगा शपथ पत्र
यदि मिड टर्म में छात्र की उपस्थिति कम है तो अभिभावकों के शपथ पत्र जमा कराने पर उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल जाएगी। शपथ पत्र में लिखकर देना होगा कि छात्र भविष्य में उपस्थिति को सुधार लेगा। यदि वार्षिक परीक्षा के समय छात्र की उपस्थिति दस फीसदी से अधिक लेकिन 15 फीसदी से अधिक नहीं है, तब स्कूल प्रमुख छात्र व उसके अभिभावक द्वारा कमी के कारणों की वास्तविकता से संतुष्ट होने पर कारण बताते हुए संबंधित डीडीई को भेज सकता है। 

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