नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब आफ इंडिया के स्पीकर हॉल में देश के महान किसान-मजदूर नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती का स्मृति समारोह का आयोजन युवा चेतना के द्वारा किया गया। स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी, भारत सरकार के कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय मयुख, युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह, लालबहादुर शास्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक एवं अन्य गणमान्य लोगों ने दीप प्रज्ज्वलित कर स्मृति समारोह का शुभारंभ किया।
उद्घाटन करते हुए स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती विश्व के महानतम किसान-मजदूर नेता थे। स्वामी सहजानंद संत रहते हुए देश निर्माण हेतु संघर्ष करते रहे। स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि सहजानंद सरस्वती गरीबों के भगवान थे।
मुख्य अतिथि भारत सरकार के कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने जमींदारों के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ी। बिहार सहित पूरी दुनिया में स्वामी सहजानंद जैसा प्रवर्तक कोई नहीं हुआ। सिंह ने कहा कि रोहित को धन्यवाद है कि हर वर्ष स्वामी जी को याद करते हैं। सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है जब हमें सनातन को बचाना होगा।
सिंह ने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली कैबिनेट में किसानों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। हमारे प्रधानमंत्री स्वामी सहजानंद के ही दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं। कांग्रेस और इंडी गठबंधन गरीब विरोधी है। अध्यक्षता करते हुए युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा कि हमने बिहार को बचाने की लड़ाई लड़ी है। जंगलराज के खिलाफ हमारे लोग शहीद हुए हैं। आने वाले 2025 के विधानसभा के चुनाव में 25 सीटो के नीचे तेजस्वी यादव के अहंकार को समेटना है।
सिंह ने भारत सरकार से आग्रह किया कि बिहटा के हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन का नाम स्वामी सहजानंद सरस्वती पर हो। सिंह ने कहा कि एक कृषि विश्वविद्यालय भी स्वामी सहजानंद के नाम पर समर्पित हो। सिंह ने कहा कि पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा है।
विशिष्ट अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. संजय मयुख ने कहा कि युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह के तीनों मांग को पूरा कराने के लिए मैं भारत सरकार से कहूंगा। मयुख ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने आजीवन गरीब वर्ग के समग्र विकास के लिए काम किया है। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।
इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डा. मुरली मनोहर पाठक, एचएन शर्मा, अंजनी कुमार राजू,रंजीत चौधरी,राजेंद्र यादव,काशीनाथ राय,हरेंद्र पासवान,मोहन राम,राकेश महतो,अश्फाक ख़ान आदि उपस्थित रहे।