जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रिपल तलाक पीड़ित महिलाओं की संख्या करीब 7 हजार है। इसमें वे ट्रिपल तलाक पीड़ित महिलाएं शामिल नहीं हैं, जो अन्याय सहने के बाद चुप बैठ गईं और कहीं भी शिकायत दर्ज नहीं कराई। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत दर्ज न कराने वाली महिलाओं की संख्या भी काफी हो सकती है, पर उन्हें ट्रेस करना आसान नहीं है। इसलिए पहले चरण में एफआईआर दर्ज कराने या कोर्ट केस करने वाली महिलाओं को ही शामिल किया गया है। अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय के उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि बजट का अनुमान लगाते हुए प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। शीघ्र ही इसे कैबिनेट से पास कराया जाएगा।