10 जुलाई को खतरे के निशान के पार हुआ था जलस्तर
10 जुलाई को शाम पांच बजे यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए 205.40 मीटर पहुंच गया था और रात 11 बजे तक यह 206.83 मीटर था। 12 जुलाई को जलस्तर ने 1978 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए 208.13 मीटर दर्ज किया। इसके बाद 13 जुलाई को रात आठ बजे तक यमुना अब तक के सबसे ऊपरी जलस्तर 208.66 मीटर तक पहुंच गई थी, लेकिन घंटे भर बाद नौ बजे जलस्तर में एक सेंटीमीटर की गिरावट आई।
अगले चार दिन बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने दिल्ली में अगले चार दिन बारिश की संभावना जताई है। बारिश हल्की से मध्यम स्तर की होगी।
अगले दो घंटों में बारिश की संभावना
दिल्ली-एनसीआर के कंझावला, मुंडाका, पश्चिम विहार बहादुरगढ़ के कुछ स्थानों और आसपास के इलाकों में अगले दो घंटों में हल्की तीव्रता वाली बारिश होने की संभावना है।
मंगलवार को हुई थी बारिश
मंगलवार शाम साढ़े पांच बजे तक औसतन 000.7 मिमी बारिश दर्ज की गई। रिज में सर्वाधिक 21.0 मिमी, पीतमपुरा में 11.0, मुंगेशपुर में 4.0, लोदी रोड में 3.9, पालम में 0.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। दिल्ली में मंगलवार को अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री कम 33.4 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 27.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
फिर से खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा जलस्तर
यमुना का जलस्तर एक बार फिर से खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। बुधवार सुबह नौ बजे नदी का जलस्तर 205.60 दर्ज किया गया।
10 से 18 जुलाई तक यमुना में दर्ज हुआ ये रिकॉर्ड
14 जुलाई को अधिकतम जलस्तर 208.12 मीटर रहा। इसके बाद 15 जुलाई को जलस्तर 206.10 मीटर दर्ज किया गया। 16 जुलाई को जलस्तर 205.52 मीटर रहा। 16 जुलाई को जलस्तर फिर से बढ़ने लगा और यह 205.58 मीटर दर्ज किया गया और रात को 10 बजे तक जलस्तर 206 मीटर तक पहुंच गया, लेकिन 18 जुलाई को सुबह पांच बजे से यमुना का जलस्तर लगातार नीचे आता गया और रात में आठ बजे यह 205.30 मीटर दर्ज किया गया।
बारिश से कई इलाकों में भारी जलभराव
मंगलवार दोपहर को बारिश होने पर कई इलाकों में भारी जलभराव हुआ। यमुना में गिरने वाले सभी नाले अब तक खुले नहीं हैं, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर गया। दिल्ली सचिवालय, आईटीओ और राजघाट में भारी जलभराव रहा। दिल्ली में 13 जुलाई को यमुना 45 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए उच्चतम स्तर 208.66 मीटर पर पहुंच गई थी।
कश्मीरी गेट पर बाढ़ का पानी खत्म
कश्मीरी गेट आईएसबीटी से अंतरराज्यीय बस सेवा शुरू हुई।
राजघाट से निकाला जा रहा बाढ़ का पानी
यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद राजघाट में पानी घुस गया था। अब राजघाट से बाढ़ का पानी निकालने का काम किया जा रहा है।
बीमारियों की रोकथाम के लिए मिशन मोड में काम
बाढ़ राहत शिविरों में जलजनित व मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए निगम की नौ टीमें मिशन मोड में काम कर रही हैं। निगम के जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों व राहत शिविरों में जलजनित व मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए नियमित रूप से मच्छररोधी दवा का छिड़काव व फॉगिंग की जा रही है। डीबीसी चेकर्स प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन की जांच कर रहे हैं। मंगलवार को शिविरों में 216 ओआरएस के पैकेट बांटे और 637 ओपीडी आयोजित की, 325 स्वास्थ्य परामर्श दिए गए और बुनियादी दवाएं भी दीं। ओपीडी व हेल्थ टॉक भी आयोजित की गई।
सड़कों से हटाई मिट्टी
सड़कों पर बह कर आई मिट्टी व गाद को साफ करने के लिए 7 स्मॉक गन लगाईं हैं। मंगलवार को नौ रोड स्ट्रेच साफ किए गए। बेला रोड, निगम बोध घाट, शांति वन से विजय चौक, प्रियदर्शिनी कॉलोनी, मंकी ब्रिज से शांति वन, मोनेस्ट्री मार्केट और यमुना बाजार से आवागमन सुगम हो गया है। बेला गांव, मिलेनियम डिपो रिंग रोड, हाफिज नगर, भैरों मार्ग और मदीना मस्जिद डी ब्लॉक जैतपुर में सफाई अभियान चलाया है।
बारिश के बाद सुपर सकर मशीनों से निकाला पानी
बारिश के बाद मंगलवार को कई जगहों पर सुपर सकर मशीनों से पानी निकालना पड़ा। निगम ने वजीराबाद तिमारपुर, इंदिरा विहार, हकीकत नगर, मुखर्जी नगर, झरोड़ा में सुपर सकर मशीनें व पंप लगाकर जल की निकासी कराई। राजघाट, आईटीओ, दिल्ली सचिवालय और पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में भारी जलभराव हुआ।
1978 में आई थी दिल्ली में भयंकर बाढ़
इससे पहले 1978 में यमुना का सर्वाधिक जलस्तर 207.49 मीटर पहुंच गया था, तब बाढ़ से दिल्ली में भारी तबाही हुई थी। 43 वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि यमुना में समा गई थी और भारी जन-धन की हानि हुई थी, लेकिन इस बार यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ने के बावजूद उतनी जन-धन की हानि नहीं हुई, क्योंकि मौजूदा समय यमुना के करीब सभी किनारों पर पुश्ते बने हैं, जिसके कारण बाढ़ का पानी खादर क्षेत्र में ही फैला। इससे नदी के किनारे के कुछ इलाके ही डूबे। रिहायशी इलाकों में पानी नहीं पहुंच सका।
जख्मों के निशान गहरे
पानी में उतार-चढ़ाव के बीच यमुना अपने फ्लड प्लेन में जख्मों के गहरे निशान भी छोड़ रही है। वह भी ऐसे, जिसे दिया उसे दिल्ली ने ही है, प्रदूषकों को नदी में डालकर। इस वक्त वह अपने ऊपर हुए अत्याचार से दिल्लीवालों को रूबरू करवा रही हैं। हर तरफ बिखरा मलवा, फैली प्लास्टिक की पन्नियां इसका सबूत दे जाएंगी।
बाढ़ पीड़ितों का पलायन जारी
मयूर विहार यमुना खादर के पास बाढ़ पीड़ितों का पलायन जारी है। धर्मपाल भी बाढ़ आने की वजह से अपने परिवार सहित ग्रेटर नोएडा में अपने गांव विसरख की और चल दिए।
राजघाट परिसर से बाढ़ का पानी निकालने का काम जारी
राजघाट परिसर में बाढ़ के पानी को निकालते के लिए बड़ी संख्या में लगाए गए है कर्मी। सबसे पहले प्रवेश द्वार के दोनों तरफ मिट्टी की बोरी लगाकर पंप से पानी को निकाला जाएगा।