राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल ने भैंस की क्लोन गरिमा को तैयार करने में 2009 में ही सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन जलवायु परिवर्तन के बीच ऐसी प्रजातियों की जरूरत महसूस हुई जो अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक ठंड को सहन कर बेहतर दुग्ध उत्पादन में सहायक बन सकें।
एनडीआरआई के निदेशक डॉ.धीर सिंह ने बताया कि आज देसी गायों की कम उत्पादकता भारत में सतत दुग्ध उत्पादन के लिए बड़ी चुनौती है। इस दिशा में 2021 में उत्तराखंड लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड देहरादून के सहयोग से राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल के पूर्व निदेशक डॉ. एमएस चौहान के नेतृत्व में गिर, साहीवाल और रेड-सिंधी जैसी देसी गायों की क्लोनिंग का कार्य शुरू किया गया था।