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Delhi: वृद्धा की हत्या करने की दोषी महिला असम से गिरफ्तार, लूटपाट के लिए पति के साथ मिलकर रची थी साजिश

Tue, 23 Apr 2024 01:57 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि राजौरी गार्डन थाना क्षेत्र में 17 जुलाई, 2010 को बुजुर्ग महिला की हत्या कर दी गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी सास बिस्तर पर खून से लथपथ मृत पाई गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने वृद्धा की हत्या करने की दोषी महिला को गिरफ्तार किया है। दोषी महिला रूबी बेगम उर्फ रीना उर्फ समीना ने 2010 में पति के साथ मिलकर लूटपाट के लिए वृद्ध मकान मालकिन की हत्या कर दी थी। अदालत ने दोनों को 2016 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। 2020 में कोविड पैरोल के बाद महिला फरार हो गई थी।

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अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि राजौरी गार्डन थाना क्षेत्र में 17 जुलाई, 2010 को बुजुर्ग महिला की हत्या कर दी गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी सास बिस्तर पर खून से लथपथ मृत पाई गई। उनकी गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। जांच करने पर पता चला कि दो दिन पहले घर में रखी गई सहायिका गायब है। घर से मृतक का सामान यानी नकदी और आभूषण भी गायब पाए गए। मामला दर्जकर पुलिस ने वृृद्धा की सहायिका रूबी बेगम और उसके पति राकेश मेहरा को गिरफ्तार कर लिया था। अदालत ने दोनों को 20 जुलाई, 2016 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

कोरोना काल के दौरान दोषी महिला को आठ सप्ताह की अवधि के लिए 27 मार्च, 2020 को पैरोल पर रिहा कर दिया गया था। उसे 20 फरवरी, 2021 को जेल में आत्मसमर्पण करना था, लेकिन महिला ने ऐसा नहीं किया। एसीपी रमेश चंद लांबा की देखरेख में इंस्पेक्टर सतेंद्र मोहन, इंस्पेक्टर पवन कुमार, एसआई राकेश, एएसआई सुरेश व हवलदार ललित की टीम दोषी महिला की तलाश कर रही थी। काफी कोशिशों के बाद टीम को पता चला कि दोषी महिला अपनी बेटी के संपर्क में है। पुलिस टीम ने जांच के बाद सुभाष नगर से उसे गिरफ्तार कर लिया।
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डर की वजह से आत्मसमर्पण नहीं किया
हत्या की दोषी महिला ने खुलासा किया कि उसने पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद आत्मसमर्पण नहीं किया, क्योंकि उसका पति पहले से ही जेल में था। उसे डर था कि उसकी पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे ही गुजर जाएगी, क्योंकि वह पहले ही 10 साल से ज्यादा जेल में बिता चुकी थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह जिले में अपने पैतृक गांव में स्थानांतरित हो गई। वह तीन दिन पहले ही दिल्ली आई थी।

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