मिर्जापुर निवासी प्रेमा (28) ने बताया कि उनके पति हरियाणा में मजदूरी करते हैं। पति के पास जाने के लिए वह 31 जनवरी को नई दिल्ली तक जाने वाली पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति में प्रयागराज से जनरल कोच में सवार हुई थी। एक फरवरी की सुबह करीब 10 बजे दादरी रेलवे स्टेशन के बाद उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। कोच में मौजूद यात्री मोहम्मद नन्नू ने बताया कि वह भी काम के सिलसिले में हरियाणा के सोनीपत जा रहे थे। यात्रा के दौरान गर्भवती को प्रसव पीड़ा होने पर ट्रेन में मौजूद स्टाफ को जानकारी दी गई, लेकिन बताया गया कि दादरी स्टेशन के बाद गाजियाबाद से पहले कोई स्टेशन नहीं है।
प्रसव पीड़ा बढ़ने पर कोच में मौजूद कुछ महिलाओं ने प्रसूता के चारों ओर कपड़े से पर्दा बनाकर चलती ट्रेन में ही प्रसव कराया। रेलवे स्टेशन अधीक्षक कुलदीप त्यागी ने बताया कि सूचना मिलने पर इमरजेंसी में ट्रेन रोककर मौके पर बुलाए गए रेलवे के डॉक्टर ने मां और नवजात की प्राथमिक जांच की। बच्चे की हालत देखते हुए एंबुलेंस से दोनों को जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्चे की मौत हो गई। प्रेमा ने बताया कि यह उनका तीसरा बच्चा था।
नन्नू ने बताया कोई भी महिला के साथ जाने को नहीं था तैयार
बिहार के दरभंगा निवासी मोहम्मद नन्नू ने बताया कि जिस कोच में महिला सवार थी, उसी में वह भी सवार थे। वह सोनीपत जाने के लिए ट्रेन में सवार हुए थे। नन्नू ने बताया कि गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचने पर उस अंजान महिला व नवजात के साथ अस्पताल तक जाने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। महिला की हालत को देखकर इंसानियत के नाते मदद की। ऐसी हालत में महिला को छोड़कर जाना उचित नहीं लगा, इसलिए बीच में ही यात्रा रोककर महिला के साथ अस्पताल आ गए।