फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi: एलजी ने केजरीवाल सरकार से 97 करोड़ रुपये वसूलने का दिया निर्देश, जानिए क्या है मामला

Tue, 20 Dec 2022 01:43 PM IST
विजय पुंडीर एएनआई, नई दिल्ली

सार

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंगलवार को केजरीवाल सरकार को बड़ा झटका दिया है। एलजी ने सरकारी विज्ञापनों के रूप में प्रकाशित राजनीतिक विज्ञापनों के लिए 'आप' से 97 करोड़ रुपये वसूलने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
उपराज्यपाल वीके सक्सेना और अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने आम आदमी पार्टी पर बड़ा झटका दिया है। आप पर सरकारी की आड़ में राजनैतिक लाभ के लिए प्रकाशित और प्रसारित विज्ञापनों के मद में बकाया 97 करोड़ रुपये के भुगतान करवाने का मुख्य सचिव को निर्देश दिया है। आदेश में 15 दिनों के अंदर सरकारी खजाने में यह राशि जमा करवाने को कहा है। मामला सार्वजनिक होने पर भाजपा और कांग्रेस आप पर हमलावर है। जबकि आप ने उपराज्याल ने आदेश को गैर-कानूनी करार दिया है।

विज्ञापन


उपराज्यपाल ने 2015 के सुप्रीम कोर्ट 2016 के दिल्ली उच्च न्यायालय और 2016 के सीसीआरजीए के तहत आया है। आम आदमी पार्टी पर आप सरकार की ओर से कथित तौर पर उल्लघन के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में आम आदमी पार्टी सरकार पर आरोप है कि राजनीतिक फायदे के लिए सरकारी की आड़ में राजनैतिक विज्ञापन प्रकाशित किए गए। इसे सरकारी धन की हेराफेरी होने के साथ साथ सर्वोच्च और उच्च न्यायालय की अवमानना का मामला बताया गया है।

2016 के आदेश के जरिये सरकारी विज्ञापन में सामग्री विनियमन (सीसीआरजीए) पर एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। अगस्त 2016 में डीआईपी की ओर से प्रकाशित विज्ञापनों की जांच में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों का आप सरकार पर घोर उल्लंघन करने की बात सामने आई। इस तरह के विज्ञापनों पर खर्च की गई राशि की गणना करने सहित इसे आम आदमी पार्टी से वसूलने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन


डीआईपी ने 30 मार्च 2017 को पत्र लिखकर आम आदमी पार्टी के संयोजक को 42,26,81,265 रुपये राज्य के खजाने में तुरंत भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अलावा 54,87,87,872 रुपये का भी विज्ञापन एजेंसियों को 30 दिनों के अंदर भुगतान करने का निर्देश दिया। इसे सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के उल्लंघन करार दिया गया। पांच साल आठ महीने बीत जाने के बाद भी आप ने डीआईपी के इस आदेश का पालन नहीं किया है। इसे एक गंभीर मामला बताया गया और आदेश के बावजूद जनता के पैसा राजकोष में जमा नहीं करवाने का आरोप है। एक पंजीकृत राजनीतिक दल की की तरफ से यह आदेश की अवहेलना होने के साथ ही सुशासन के लिए भी ठीक संकेत नहीं है।

विज्ञापन

भाजपा ने बोला हमला
एलजी के आदेश के बाद दिल्ली भाजपा ने अरविंद केजरीवाल को 'जनता के पैसे से अपना प्रचार' करने वाला नेता बताया है। पार्टी ने कहा है कि जनता के पैसे से अपनी छवि चमकाने के कारण ही केजरीवाल अब तक दिल्ली की जनता को साफ पानी तक नहीं उपलब्ध करा सके। पार्टी ने मांग की है कि अरविंद केजरीवाल को जनता का यह पैसा तत्काल सरकार के खजाने में जमा कराना चाहिए।

दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि इस मामले के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अरविंद केजरीवाल जनता के पैसे से अपना चेहरा चमकाने की कोशिश कर रहे थे। इस मामले में बार-बार सरकार से प्रश्न किया गया, लेकिन वह इस पर कोई जवाब देने से बचती रही है। उन्होंने कहा कि इसी से समझ आता है कि सत्ता में आने के सात साल बाद भी सरकार लोगों को साफ पानी तक क्यों उपलब्ध नहीं करा पाई। 

आम आदमी पार्टी की नीतियों पर हमला करते हुए भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा गठित कमेटी CCRGA ने अरविंद केजरीवाल को 97 करोड़ रुपये सरकार के खजाने में जमा करने के लिए कहा है। यह मामला मार्च 2017 तक के लिए ही है, लेकिन तब से अब तक लगभग पांच साल बीत चुके हैं और इस दौरान भी केजरीवाल सरकार लगातार जनता के पैसे से अपना प्रचार करती रही। उन्होंने कहा कि इस मामले पर भी जांच होनी चाहिए कि केजरीवाल ने अब तक जनता का कितना पैसा अपने निजी प्रचार पर खर्च किया। इसे जनता को वापस किया जाना चाहिए। 

नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि 2013 के पहले तक दिल्ली की सरकारें अपने प्रचार पर 18 करोड़ रुपये वार्षिक तक ही खर्च करती थीं, लेकिन केजरीवाल के सत्ता में आने के बाद यह राशि बढ़कर लगभग 600 करोड़ रुपये तक हो गई। सरकार ने इस साल इससे भी ज्यादा राशि विज्ञापन पर खर्च करने की योजना बनाई है। 

बिधूड़ी ने आरोप लगाया कि सरकार का यह विज्ञापन भी उसकी पार्टी के अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से चलाया जा रहा था। इस तरह विज्ञापन के मामले में भी खर्च दिखाकर जनता के पैसे की लूट की गई। उन्होंने कहा कि यह घोटाला 97 करोड़ का नहीं, बल्कि 400 करोड़ रुपये का हो सकता है। इसकी सीबीआई जांच की जानी चाहिए। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें