प्रदेश भाजपा ने दिल्ली सरकार पर यमुना सफाई के नाम पर घोटाला करने का आरोप मढ़ा है। कहा है कि इसकी जांच सीबीआई से होनी चाहिए। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले आठ सालों में दिल्ली जल बोर्ड को दिवालिया संस्था बना दिया है। जलबोर्ड पर 71,000 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है। यमुना सफाई के नाम पर करोडों रुपया बर्बाद किया गया। इस संदर्भ में भाजपा दिल्ली के उपराज्यपाल को मांग पत्र देगी। मीडिया से बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने चार जून को यमुना के तट पर आयोजित होने वाली मानव श्रृंखला में शामिल होने की भी अपील की।
वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली की जनता पानी की किल्लत से जूझ रही हैं, झुग्गी बस्ती से लेकर पाश कॉलोनियों तक दिल्ली जल बोर्ड से लोगों को गंदा पानी आने की शिकायत है। अधिकृत कॉलोनी हो, झुग्गी बस्ती या स्लम बस्ती, सभी जगह नई पानी सप्लाई की पाइपलाइन डालने का काम ठप है। इसी तरह यमुना सफाई पर केजरीवाल सरकार ने 6,800 करोड़ रुपये की बर्बादी की है बावजूद यमुना पहले से अधिक मैली है।
सचदेवा ने कहा है कि लाभ में चलने वाला दिल्ली जल बोर्ड आज 71,000 करोड़ के कर्ज में और दिल्ली सरकार इस वित्त वर्ष 2023-24 का पूरा बजट भी झोंक दे तो भी इसे लाभ में नहीं ला सकती। दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी मानती है कि दिल्ली हरियाणा बार्डर स्थित पल्ला गांव पर जब यमुना दिल्ली में घुसती है तो उसका जल लगभग निर्मल होता है। यह खेद पूर्ण है कि विशेषज्ञों के अनुसार, यमुना अपनी कुल यात्रा लगभग 1,400 किलोमीटर की यात्रा में से केवल 34 किलोमीटर दिल्ली में बहती है पर यमुना के कुल प्रदूषण का लगभग 75 प्रतिशत दिल्ली से जुड़ता है।
यमुना सफाई संकल्प को लेकर आयोजित लोक संसद की मानव श्रृंखला में शामिल होने की अपील की
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने लोगों से अपील की है कि वह लोक संसद के स्वच्छ यमुना अभियान से जुड़े। चार जून को यमुना को बचाने के लिए प्रस्तावित मानव श्रृंखला का हिस्सा बने ताकि सरकार को यह बताया जा सके कि दिल्ली वाले अब निर्मल यमुना की मांग करते है, स्वच्छ पानी के लिए भी यह बेहद आवश्यक है। मानव श्रृंखला वजीराबाद से कालिंदी कुंज के बीच पर्यावरण दिवस से एक दिन पहले लगेगी। इसमें पूरी दिल्ली को शामिल करने का लक्ष्य लोक संसद ने रखा है।
सचदेवा ने आगे कहा कि दिल्ली सरकार ने आवश्यक छह आमोनिया ट्रीटमेंट प्लांट और लगभग 22 आवश्यक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा पाई। यह शर्मनाक है कि छोटे नाले ही नहीं बड़े नालों का पानी भी बिना ट्रीटमेंट यमुना में गिर रहे हैं। दिल्ली की जनता और भाजपा दोनों मानते है कि यमुना सफाई घोटाले का खर्च राजनीतिक विस्तार अभियान में लग रहा है।