नई दिल्ली। विश्वविद्यालय जीवन व्यक्ति के चरित्र, दृष्टि और व्यक्तित्व के निर्माण का स्वर्णकाल होता है। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं बल्कि जीवन को अर्थपूर्ण बनाने की साधना है। सच्चा विद्यार्थी वही है जो श्रद्धा, अनुशासन और जिज्ञासा के साथ अध्ययन करता है। यह बातें श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षारंभ कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने कही। कार्यक्रम में कुलपति ने छात्रों से भारतीय परंपरा, संस्कृति और शास्त्रीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान एवं तकनीकी के साथ जुड़ने की अपेक्षा भी जताई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक परिवेश से परिचित कराना और उन्हें उच्च शिक्षा के आदर्श मूल्यों से ओत-प्रोत करना था। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. आदित्य पंचोली ने किया। ब्यूरो