दिल्ली हाई कोर्ट ने 24 नवम्बर 2023 को इसपर फैसला किया और छह महीन के भीतर किले की जगह को अवैध कब्जाधारियों के चंगुल से वापस लेने का निर्देेश दिया। अब एएसआई ने 12-13 जनवरी को डीडीए, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर एक अभियान चलाकर करीब 1200 घरों पर नोटिस चस्पा किए हैं। कोर्ट के आदेशानुसार किले की जमीन पर बने इन सभी घरों से सामान इत्यादि निकालने के लिए लोगों को 15 दिन का समय दिया गया है।
गांव वालों का दावा, वह लाल डोरे के भीतर
मेहरौली-बदरपुर रोड पर करीब छह किलोमीटर में तुगलकाबाद किला फैैला है। किले की पिछली दीवार से सटा तुगलकाबाद गांव है, जो आजादी के पहले का है। इस गांव का दायरा इसके बसने के समय की तुलना में कई गुना बढ़ गया है। गांव के लोगों का कहना है कि वह लाल डोरे के भीतर ही बसे हैं। वहीं एएसआई के अधिकारियों का कहना है कि सालों से बढ़ते बढ़ते स्थानीय लोगों ने किले की आधे से ज्यादा जमीन पर कब्जा जमा लिया।
संवारा जा रहा 800 साल पुराना किला
तुगलकाबाद किला करीब 800 साल पुराना दिल्ली का तीसरा सबसे पुराना किला है। इस किले को गयासुद्दीन तुगलक ने 1321 से 1325 के बीच बनवाया था। तीन साल पहले तक यह किला खंडहर और पत्थरों का ढेर था। लेकिन एएसआई ने इसे फिर से संवारने का काम शुरू किया है। इसके तहत यहां पर सौंदर्यीकारण किया जा रहा है। किले के सबसे ऊंचे बुर्ज विजय मंडल के चारों तरफ रेलिंग लगाई गई है। यहां से पूरा किला, गयासुद्दीन का मकबरा, तुगलकाबाद गांव और आस पास के इलाकों को साफ तौर पर देखा जा सकता है। इसके भीतर बैठने के लिए प्लेटफार्म लगाए गए हैं। बुर्ज और यहां की एक पुरानी बावली तक जाने के लिए पाथ बनाए गए हैं। बाकी हिस्से को भी संवारने का काम किया जा रहा है।