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Delhi: पर्यटकों को फिरोज शाह कोटला में भा रही है हॉन्टेड वॉक, युवा सुनने पहुंचे रहे हैं भूतिया कहानी

Thu, 15 Jun 2023 02:23 AM IST
Digvijay Singh आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्लीअमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

 देश ही नहीं विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंच रहे हैं। हाल ही में हॉन्टेड हाउस नाम से शुरू किया गया एतिहासिक स्मारक लोगों को आकर्षित कर रहा है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली गेट के पास स्थित फिरोज शाह कोटला में कुछ दिनों पहले शुरू हुई हॉन्टेड वॉक लोगों को भा रही है। देश ही नहीं विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंच रहे हैं। हाल ही में हॉन्टेड हाउस नाम से शुरू किया गया एतिहासिक स्मारक लोगों को आकर्षित कर रहा है। पर्यटक इसे देखने व भूतिया कहानी सुनने के लिए आ रहे हैं। खासतौर पर युवाओं में खासा उत्साह है। अगर आप डरावनी कहानियों में यकीन रखते हैं और भूतिया कहानी सुनना व यहां कि सैर करना चाहते हैं तो चले आइए। ये जगह आपको जरूर पसंद आएगी। हॉन्टेड वॉक खूनी दरवाजे से शुरू होकर फिरोज शाह कोटला के अशोक स्तंभ के पास संपन्न होती है।

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स्मारक में पथरीले मार्ग से गुजर कर रास्ता तय करना पड़ता है। सड़क के बीच स्थित खूनी दरवाजे के पास पेड़ व झाड़ियां हैं। इसी रास्ते से होकर कंटीली झाड़ियों के बीच में यह स्मारक है। इसके अंदर जाते ही इसमें पसरा अंधेरा डराने वाला होता है। पर्यटकों को दूर से ही यह स्मारक भूतिया होने की अनुभूति करा रहा है। लोगों का मानना है कि यहां लोगों के चीखने और रोने की आवाजें आती हैं। यह भी कहा जाता है कि सन 1857 की क्रांति के दमन के बाद अंग्रेजों ने यहां अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के दो बेटों व एक पोते की गोली मारकर हत्या कर दी थी। साथ ही कई स्वतंत्रता सेनानियों को मौत के घाट उतार दिया था। वहीं, फिरोज शाह स्मारक में एक बावली, अशोक के समय का भव्य स्तंभ और इमारत के चबूतरे के नीचे गुप्त कमरों सहित कई चीजें हैं। माना जाता है कि यहां अदृश्य आत्माएं जिन्न को खुश करने के लिए इकट्ठा होती हैं। इसलिए लोग यहां जाने से डरते हैं। यह हवेली भूतिया हवेली के नाम से जानी जाती है।

शिकारगाह के लिए था बनवाया स्मारक
सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने सन 1354 में इस स्मारक को अपने शिकारगाह के लिए बनवाया था। फिरोज शाह के समकालीन इतिहासकार शम्स सिराज अफीफ ने लिखा है कि नगर की इमारतें उत्तरी रिज पर फिरोज शाह द्वारा बनवाए गए महल व शिकारगाह (जो वर्तमान में पीर गायब के नाम से जानी जाती है) तक फैली है। इसमें लाल कोट पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। दिल्ली टूरिज्म ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीटीटीडीसी) ने यहां हुई घटनाओं के चलते इसे हॉन्टेड हाउस माना है। हालांकि, स्मारक में लोगों ने जगह-जगह दिए व अगरबत्ती जलाई हुई हैं। यह जगह सुनसान है। यहां शाम के समय डरावनी आवाजें सुनाई देती हैं।

 

इतिहास से रूबरू करा रहा स्मारक
लोगों तक इसकी कहानियों को पहुंचाने और इतिहास से रूबरू कराने के लिए डीटीटीडीसी हॉन्टेड वॉक लेकर आया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पहले इसके बारे में लोगों के बीच जानकारी का अभाव था, लेकिन अब लोग देश ही नहीं विदेशी पर्यटक भी पहुंच रहे हैं। बीते सप्ताह से अब तक 150 से अधिक लोग यहां की सैर करने आ चुके हैं। लोगों के बीच यह जगह तेजी से मशहूर हो रही है। बाहर बोर्ड भी जल्द लगाया जाएगा। वॉक के लिए डीटीटीडीसी की वेबसाइट से बुकिंग की जा सकती है।

 

मैं पहले भी यहां आया हूं, लेकिन इसकी कहानी पता चली तो इसे फिर से देखने आया हूं। यहां पहुंचकर अच्छा लग रहा है। यहां आकर नया अनुभव मिला है।
-उदित, गाजियाबाद

 
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मुझे हॉन्टेड जगहों पर घूमना पसंद है। मैं अपनी दोस्तों के साथ यहां आई हूं। यहां काफी कुछ देखने को मिल रहा है। सुनसान होने से यह जगह डरावनी है।
-प्रिया, गुरुग्राम
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