नई दिल्ली। मंडी हाउस स्थित एलटीजी ऑडिटोरियम में बुधवार को नाट्यकुंभ 2026 के अंतर्गत हिंदी नाटक ‘पश्मीना’ का मंचन किया गया। मृणाल माथुर लिखित और साजिदा साजी निर्देशित इस नाटक में कश्मीर की पृष्ठभूमि में मानवीय संवेदनाओं, बिछड़ने के दर्द और आपसी रिश्तों को दिखाया गया। आईएल दास सभागार में आयोजित इस नाटक की प्रस्तुति ट्रेजर आर्ट एसोसिएशन के कलाकारों ने दी। नाटक की कहानी अमर और विभा सक्सेना नाम के दंपती के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों अपने शहीद सैनिक बेटे की यादों और मन की शांति की तलाश में कश्मीर पहुंचते हैं। वहां उनकी मुलाकात पश्मीना शॉल बेचने वाले एक स्थानीय कश्मीरी दुकानदार से होती है। इस मुलाकात के दौरान अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों के बीच दुख, संवेदना और अपनत्व का रिश्ता उभरकर सामने आता है। नाटक में पश्मीना शॉल को केवल एक कपड़े के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय रिश्तों और साझा संवेदनाओं के प्रतीक के तौर पर प्रस्तुत किया गया। कहानी यह संदेश देती है कि धर्म, सरहद और राजनीतिक मतभेदों से परे अपनों को खोने का दर्द सभी के लिए एक जैसा होता है। वाइबग्योर थियेटर की ओर से आयोजित नाट्यकुंभ 2026 का यह दूसरा संस्करण है। इसके अंतर्गत दिल्ली समेत तीन शहरों में 16 मौलिक नाटकों का मंचन किया जा रहा है। यह दिल्ली में 23 अक्तूबर से 1 नवंबर तक आयोजित की जाएगी। संवाद