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LPG Crisis: गैस किल्लत से दिल्ली के वृद्धाश्रम की रसोई भी पड़ी ठंडी, जूझ रहे भोजनालय; कालाबाजारी जोरों पर

Wed, 01 Apr 2026 04:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दक्षिण दिल्ली के आसोला-महरौली स्थित एक वृद्धाश्रम में गैस खत्म होने के कारण रसोई बंद है। यहां रह रहे करीब 42 बुजुर्गों को फल और ब्रेड खाकर गुजारा करना पड़ रहा है।
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गैस एजेंसी पर लगी कतार - फोटो : संवाद
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विस्तार
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एलपीजी गैस की कमी और बढ़ती कीमतों ने छोटे भोजनालयों, ढाबों और आम लोगों के साथ वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दक्षिण दिल्ली के आसोला-महरौली स्थित एक वृद्धाश्रम में गैस खत्म होने के कारण रसोई बंद है। यहां रह रहे करीब 42 बुजुर्गों को फल और ब्रेड खाकर गुजारा करना पड़ रहा है। आश्रम प्रबंधन का कहना है कि कुछ लोग कालाबाजारी में 3,200 रुपये तक में सिलेंडर देने की पेशकश कर रहे हैं, लेकिन यह सभी के लिए संभव नहीं है। यह स्थिति शहर के अन्य भोजनालयों की भी है। कई जगह तो कोयले और लकड़ी जलाकर खाना बनाना शुरू कर दिया है।

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राजौरी गार्डन में वैष्णो रसोई चलाने वाले नीरज चावला बताते हैं कि गैस की कमी और महंगे सिलेंडरों के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार दुकान बंद करने का मन होता है, लेकिन सामाजिक शर्म के कारण वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। पहले जहां चावला की रोजाना बिक्री करीब 12,000 रुपये तक पहुंच जाती थी, अब उसमें काफी गिरावट आ गई है। बढ़ती लागत और कम होती आमदनी के चलते उन्हें अपने दो कर्मचारियों को भी हटाना पड़ा है।
एलपीजी संकट का असर सिर्फ कारोबारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मजदूर वर्ग और आम लोगों की जिंदगी भी इससे प्रभावित हो रही है। पहले 5 किलो का छोटा सिलिंडर 80 से 100 रुपये प्रति किलो में भर जाता था, लेकिन अब इसकी कीमत 300 से 350 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। ऐसे में एक सिलिंडर भरवाने में करीब 1,800 रुपये तक खर्च हो रहा है, जो दिहाड़ी मजदूरों के लिए बहुत भारी पड़ रहा है।
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खाना पकाने का कोई साधन नहीं बचा
बिहार के समस्तीपुर से आए एक रिक्शा चालक ने बताया कि पहले वह सस्ते में सिलिंडर भरवा लेते थे, लेकिन अब यह संभव नहीं है। इसी तरह कई लोग अब सस्ती थाली भी नहीं खरीद पा रहे हैं, क्योंकि खाने की कीमत 35 रुपये से बढ़कर 90 रुपये तक पहुंच गई है। यमुना पुश्ता और सीलमपुर जैसे इलाकों में रहने वाले मजदूरों का कहना है कि उनके पास अब खाना पकाने का कोई साधन नहीं बचा है।

जो सिलिंडर 28 फरवरी को बुक किया था, वह 3 मार्च को मिल गया था लेकिन, अब समस्या यह है कि 35 दिन पूरे होने से पहले नई बुकिंग नहीं हो रही है। ऐसे में वह सिलिंडर बुक भी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में रसोई बंद करनी पड़ी और बुजुर्गों को केवल ब्रेड और फल देकर काम चलाना पड़ रहा है। एक-दो दिन इंतजार करेंगे अगर सिलिंडर मिला तो ठक नहीं तो महंगे दामों पर खरीदेंगे। हालांकि, यह काम वह आखिरी विकल्प के रूप में ही करना चाहूंगा।
-प्रवेश जैन, प्रबंधक वृद्धाश्रम

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