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Delhi NCR News: जेएनयू छात्र संसद में गूंजा पदाधिकारियों के निष्कासन का मुद्दा

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- जेएनयू परिसर में हुई छात्र संसद, कई सांसद भी रहे मौजूद
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्र संघ पदाधिकारियों सहित पूर्व अध्यक्ष के निष्कासन के विरोध में शनिवार को परिसर में छात्र संसद आयोजित हुई। इसमें हिस्सा लेने वाले छात्रों से लेकर शिक्षकों और सांसदों ने जेएनयू प्रशासन के निष्कासित करने के फैसले की निंदा और आक्रोश व्यक्त किया। छात्र संसद के देरी से शुरू होने के लिए जेएनयू छात्र संघ ने प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। छात्र संघ के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर साउंड सिस्टम न पहुंचे उसके लिए प्रशासन ने रुकावट पैदा की। छात्र संघ के महासचिव सुनील यादव ने बताया कि इस कारण छात्र संसद दो घंटे की देरी से दोपहर एक बजे शुरू हुई। छात्र संसद में तीन सत्र आयोजित हुए। इसमें निष्कासन, कैंपस से बाहर करने, जुर्माना लगाने, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक और यूजीसी अधिनियम 2026 को लेकर चर्चा हुई। पहले सत्र में अलग-अलग विश्वविद्यालय के छात्र यूनियन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। दूसरे सत्र में छात्र संगठनों के प्रतिनिधि, आखिर सत्र में लोकसभा और राज्यसभा सांसद और प्रोफेसर शामिल रहे। छात्र संसद का आयोजन शाम साढ़े सात बजे तक चला। छात्र सांसद में सभी ने निष्कासन के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। अब जेएनयू के अलग-अलग स्कूलों में जीबीएम बुलाकर प्रशासन के फैसले को लेकर विरोध दर्ज कराएंगे। बता दें कि पिछले वर्ष 21 नवंबर को सेंट्रल लाइब्रेरी में हुई तोड़फोड़ के विरोध में जेएनयू चीफ प्रॉक्टर ने छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के.गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित, छात्रों पर जुर्माना और कैंपस से बाहर करने का आदेश जारी किया है। इसके अलावा चीफ प्रॉक्टर ने जांच में आठ और छात्रों को भी दोषी पाया है। आदेश जारी होने के बाद से छात्र अलग-अलग तरह से अपना विरोध दर्ज करा रहे है।
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