अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की याचिका पर केंद्र सरकार का रुख जानने की मांग की। याचिका में धन शोधन निवारण कानून (पीएमएलए) की कुछ प्रावधानों और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनके खिलाफ चल रही जांच को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने कांग्रेस नेता के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की मांग पर केंद्र सरकार को याचिका में पक्षकार बना दिया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने ईडी की ओर से दलील देते हुए कहा कि केंद्र सरकार को पक्षकार बनाए बिना केंद्रीय कानून को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। उन्होंने शिवकुमार से या तो याचिका वापस लेने या अदालत से इसे खारिज करने की अपील की। खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र से जवाब मांगा और शिवकुमार को कोर्ट कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा जारी रखने का आदेश दिया। यह याचिका 2022 में दायर की गई थी। ईडी की जांच मुख्य रूप से डीके शिवकुमार के खिलाफ धन शोधन से संबंधित है। शिवकुमार की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि बिना केंद्र को शामिल किए याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती, जिस पर अदालत ने सहमति जताई और केंद्र को पक्षकार बनाया। अदालत अब केंद्र सरकार के जवाब के बाद मामले की आगे सुनवाई करेगी। इस बीच शिवकुमार पर कोई जबरन कार्रवाई नहीं होगी।