-भव्य रामलीला में युद्ध के रोमांचक दृश्यों ने बांधा समां, पति के शीश की मांग करने पहुंचीं सुलोचना तो भावुक हुए दर्शक
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। रणभूमि में कुंभकरण का वध, लक्ष्मण और मेघनाद के बीच भीषण युद्ध और पति के वियोग में सती सुलोचना की करुण पुकार। भव्य रामलीला सोसाइटी की ओर से आयोजित रामलीला महोत्सव में इन प्रसंगों के सजीव मंचन ने दर्शकों को रोमांचित करने के साथ भावुक भी कर दिया। युद्ध के दृश्यों पर पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा, वहीं सती सुलोचना के मार्मिक प्रसंग ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। भव्य रामलीला सोसाइटी के प्रधान सतीश लूथरा ने बताया कि शाम आठ बजे से शुरू हुए मंचन को देखने के लिए बड़ी संख्या में परिवार पहुंचे। आयोजन के दौरान पूरा रामलीला प्रांगण जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजता रहा। मंचन में सबसे पहले कुंभकरण वध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। कुंभकरण के विशालकाय स्वरूप और युद्धभूमि में उसके अंत को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया। रामलीला के अंत में भगवान श्रीराम के बाणों से कुंभकरण का वध हुआ। लक्ष्मण और मेघनाद के बीच हुए भीषण युद्ध और मेघनाद वध के दृश्य ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। युद्ध के इन रोमांचक दृश्यों के बाद सती सुलोचना का प्रसंग मंचित किया गया। पति मेघनाद के वध के बाद सुलोचना जब उनके शीश को लेकर भगवान श्रीराम के शिविर में पहुंचीं, तो उनके दुख और पतिव्रता भाव के चित्रण ने पूरे पंडाल को भावुक कर दिया।