नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने आवारा कुत्तों की समस्या पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका (पीआईएल) दर्ज कर ली है। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) से जवाब मांगा है कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए जन्म नियंत्रण (स्टेरिलाइजेशन) और टीकाकरण के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं। अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। साथ ही कुत्तों को आश्रय स्थलों में शिफ्ट कर स्टेरिलाइजेशन और टीकाकरण कराने के आदेश दिए थे। बाद में इन निर्देशों में कुछ संशोधन किए गए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान पीआईएल दर्ज करने और प्रगति की निगरानी करने का निर्देश दिया था। मुख्य सचिवों को सात अगस्त 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है। ब्यूरो