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जब दुल्हन निकली उम्रदराज: रकम वापसी को 4 दिन टिकी बरात, 16 साल की बेटी से शादी कराने के नाम पर ऐंठे थे 20 रुपए

Wed, 26 Jul 2023 10:35 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

पुरानी एफआईआर समेत अन्य कागजात को संभालकर रखने वाले दिल्ली पुलिस के एसीपी राजेंद्र सिंह कलकल कहते हैं कि पहले ठगी के एक से एक नायाब मामले सामने आते थे। इसी में से एक रोचक किस्सा वर्ष 1905 का है। ठगी के इस मामले की एफआईआर 9 जून, 1905 को सब्जी मंडी थाने में हुई थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में पुलिस अधिनियम लागू होने के बाद जब थानों में मुकदमें दर्ज होने का सिलसिला शुरू हुआ तो एक से एक विचित्र फरियादी इंसाफ की गुहार लेकर पहुंचे। हाल ही में दिल्ली पुलिस की ओर से उस समय की एफआईआर व अन्य डाटा ऑनलाइन किए जाने के बाद ऐसे तमाम रोचक किस्सों पर रोशनी पड़ती है।
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पुरानी एफआईआर समेत अन्य कागजात को संभालकर रखने वाले दिल्ली पुलिस के एसीपी राजेंद्र सिंह कलकल कहते हैं कि पहले ठगी के एक से एक नायाब मामले सामने आते थे। इसी में से एक रोचक किस्सा वर्ष 1905 का है। ठगी के इस मामले की एफआईआर 9 जून, 1905 को सब्जी मंडी थाने में हुई थी। 

शिवा वल्द हरदेव ने सब्जी मंडी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने रिश्तेदार फत्ते को अपनी शादी कराने को कहा था। दो महीने के बाद फत्ते अपने परिचित रूपराम को लेकर आया। रूपराम ने कहा कि उसकी लड़की 16 वर्ष की है और 20 रुपये में शादी करा देगा। 
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शिवा ने रूपराम को 20 रुपये दे दिए और शादी तय हो गई। चार दिन बाद जब शिवा रूपराम के घर बरात लेकर पहुंचा तो दुल्हन के जोड़े में उम्रदराज महिला को दिखाने लगा। कुछ समय बाद महिला लापता हो गई। बाद में पता लगा कि रूपराम की कोई बेटी नहीं है। रूपराम के घर चार दिन से बरात ठहरी रही। उसने पैसे वापस किए और न ही शादी कराई।

साइकिल पर लिफ्ट दी...और जेवरात   व कपड़े की गठरी ले गया
रत्ना पत्नी रामजाट की ओर से नरेला थाने में 13 जुलाई, 1956 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें कहा गया था वह बवाना की ओर जा रही थी। तभी मांगे नामक व्यक्ति वहां आया और उसे बवाना छोडऩे की बात कहकर साइकिल पर बैठा लिया। 

कुछ दूर चलकर उसने रत्ना को साइकिल से उतार दिया। इसके बाद आरोपी जेवरात व कपड़ों की गठरी लेकर फरार हो गया। वहां से गुजर रहे दूसरे साइकिल सवार ने पीछा कर मांगे को पकड़ा। बाद में पता लगा कि मांगे की साइकिल पहाड़गंज इलाके से चुराई गई थी।

भूसे के नीचे छिपा रखा था गेहूं
अपराधियों को पकड़ने का एक रोचक किस्सा 23 अगस्त, 1947 को सब्जी मंडी थाने इलाके का है। सिपाही प्यारेलाल व सदा अली गश्त पर थे। शाम छह बजे जब वह रोबिन टॉकिज के पास पहुंचे तो देखा कि गोविंद राम सब्जी मंडी की तरफ से ठेला खींच कर ले जा रहा है। हालांकि, उसने ठेले पर भूसा रखा हुआ था, मगर पुलिसकर्मियों ने देखा कि गोविंदराम ठेले को खींचने में जोर लगा रहा है। दोनों सिपाहियों को संदेह हुआ और उन्हें भूसा को हटाकर देखा तो नीचे अनाज की तीन बोरियां थीं। दो बोरी गेंहू की थीं। उस समय अकाल ग्रस्त क्षेत्रों में गेंहू के व्यापार पर प्रतिबंध था।

126 वर्षों में सिगार व शराब को तलाश नहीं सकी पुलिस 10 रुपये रखा था इनाम
सब्जी मंडी थाना इलाके के बड़े होटल से 24 फरवरी, 1897 को सिगार व शराब की चोरी हुई थी। इंपीरियल होटल का कुक सब्जी मंडी थाने पहुंचा और उसने केवल नामक सौदागर का अंग्रेजी में लिखा पत्र दिया। उन्होंने पत्र में लिखा कि किसी ने उसके कमरे से सिगार का आधा पैकेट व शराब की बोतल चुरा ली।
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काफी समय बाद चोर पकड़ में नहीं आया तो उसकी गिरफ्तारी पर 10 रुपये का इनाम घोषित किया गया। इस केस को 126 वर्ष हो गए हैं, मगर दिल्ली पुलिस इस केस को अभी तक सुलझा नहीं पाई है। पुलिस ने इस केस को अदालत में अनट्रेस पेश किया था।
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