नई दिल्ली। मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम के मंच पर उकालंगन फाउंडेशन ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की एक अविस्मरणीय संध्या का आयोजन किया। एक तरफ संतूर उस्ताद बिपुल कुमार राय (पद्मश्री पं. भजन सोपोरी के शिष्य) ने राग भूपेश्वरी की प्रस्तुति में आलाप, जोर और झाला से शुरुआत की। साथ ही मध्यलय और द्रुत तीनताल तक अद्भुत निपुणता दिखाई। अंत में मिश्र काफी में एक मनभावन धुन प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्हें तबले पर उस्ताद ज़रगम अकरम खान ने सुगठित संगति दी। वहीं, दूसरी तरफ प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना शालु श्रीवास्तव अपनी टीम के साथ मंच पर उतरीं। उनका साथ जयवर्धन दाधीच (गायन), आशीष मिश्रा (तबला), दिव्यांशु कुमार (पखावज), शंभू सिसोदिया (सारंगी) और अंजलि चौहान (पढ़ंत) ने दिया । उनकी शिष्याएं, आयुषी, जूही, प्रेरणा और त्विशा ने बसंत ऋतु पर कोरियोग्राफी प्रस्तुत कर कार्यक्रम में रंग भर दिए। इस दौरान कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि पं. दीपक महाराज, लोकेश आनंद और कला समीक्षक चित्रा शर्मा मौजूद रहीं।कला-प्रेमियों और रसिकों से खचाखच भरे सभागार ने संतूर और कथक की इस अनूठी संगति का भरपूर आनंद लिया। संवाद