संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने कार्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) की फर्जी कर्मचारी बनकर 10 लाख रुपये की ठगी करने वाली महिला को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि आरोपी की ओर से पेश किए गए कुछ दस्तावेज की सत्यता अभी जांच के दायरे में है, इसलिए गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने कहा कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, ओइंद्रिला दासगुप्ता ने एमसीए के फर्जी इनवाइस, स्टांप के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के हस्ताक्षर भी जालसाजी से तैयार किए थे। कोर्ट ने आरोपी महिला को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानती पर अग्रिम जमानत दे दी। महिला पर देश न छोड़ने, गवाहों से संपर्क न करने व साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने की कड़ी शर्ते लगाई है। आरोप है कि इन फर्जी दस्तावेजों से उन्होंने शिकायतकर्ता से 42 आईफोन और अन्य सामान दिलाने के बहाने 10 लाख रुपये की मांग की। जब उन्होंने 9.66 लाख रुपये का चेक दिया तो वह बाउंस हो गया, जिससे ठगी की बात सामने आई।