बता दें कि दिल्ली के मास्टर प्लान (एमपीडी)-2041 के तहत सभी अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण और झुग्गियों के पुनर्वास पर काम किया जा रहा है। इसमें योजनाबद्ध तरीके से स्थायी समाधान निकालकर इनका विकास किया जाएगा। इसके लिए डीडीए पीएम-उदय, पीएमएवाई और लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर काम कर रहा है।
कोरोना महामारी के कारण लंबे समय तक काम लटका
अधिकारियों ने उपराज्यपाल को बताया कि अनधिकृत कॉलोनियों की सीमाओं का सही से निर्धारण न होना, कट ऑफ डेट को बार-बार बढ़ाना, झुग्गी बस्तियों की संख्या और लोकेशन को निश्चित न कर पाने से नियमितीकरण और पुनर्वास का काम लंबे समय से लटक रहा है। इसके लिए साल 2019 में पीएम-उदय और पीएमएवाई योजनाएं लाई गई थीं। हालांकि उस समय कोरोना आने के बाद यह काम लंबे समय तक लटक गया। इस पर उपराज्यपाल ने चिंता जताते हुए कहा कि यह अधिनियम विभिन्न संस्करणों में दिसंबर, 2006 से लागू है और अगर महामारी के कारण हुई बाधाओं को भी मान लिया जाए तो भी यह मामला बिना किसी विशेष कारण के अब तक लटका हुआ है।
लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
एलजी ने आदेश दिया कि अनियमित कॉलोनियों के पंजीकरण, सत्यापन और उसके बाद नियमितीकरण के लिए एक ठोस समयबद्ध कार्य योजना लेकर आएं। साथ ही इस प्रक्रिया को सरल और परेशानी मुक्त बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संबंध में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
5 किमी के दायरे में वैकल्पिक स्थलों की पहचान करेगा डीडीए
उपराज्यपाल ने मलिन बस्तियों के पुनर्वास के संबंध में, जहां पुनर्वास उसी जगह संभव नहीं है, वहां नियमानुसार डीडीए को तुरंत 5 किलोमीटर के दायरे में वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने का निर्देश दिया। साथ ही झुग्गीवासियों को पहले से ही बने फ्लैटों व घरों में पुनर्वासित करने का निर्देश दिया। इन फ्लैटों का निर्माण विभिन्न योजनाओं के तहत पहले ही किया गया है।