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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या दिल्ली के एलजी खुद को अदालत समझते हैं, रिज में पेड़ों की कटाई पर भूमिका की निंदा

Sat, 13 Jul 2024 05:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के रिज क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना खुद को अदालत समझते हैं। शीर्ष अदालत ने इस मामले में एलजी की भूमिका की निंदा की। साथ ही दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को फटकार लगाते हुए कहा कि पहले ही दिन बता देना चाहिए था कि एलजी ने पेड़ काटने के आदेश दिए थे।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के रिज क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना खुद को अदालत समझते हैं। शीर्ष अदालत ने इस मामले में एलजी की भूमिका की निंदा की। साथ ही दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को फटकार लगाते हुए कहा कि पहले ही दिन बता देना चाहिए था कि एलजी ने पेड़ काटने के आदेश दिए थे।

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जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि याचिका यहां लंबित होने के बावजूद पेड़ों की कटाई की अनुमति देने में एलजी ने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। पीठ ने एलजी की भूमिका को छिपाने के प्रयास की भी निंदा की। जस्टिस ओका ने कहा, पहली तारीख को हमें बताया जाना चाहिए था कि एलजी ने निर्देश दिए थे। एलजी की भूमिका हमें तब ही समझ में आ गई थी जब अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी खुद हमारे सामने आए थे।

पीठ ने कहा, हलफनामे से पता चलता है कि डीडीए ने एलजी से अनुमति मांगी थी। एलजी ने भी पूरी तरह से दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया, उन्होंने मान लिया कि दिल्ली सरकार के पास ‘ट्री ऑफिसर’ की शक्ति है। पीठ ने सवाल किया कि क्या डीडीए के अधिकारियों ने एलजी को बताया था कि पेड़ों को काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेना जरूरी है।
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अदालत ने डीडीए से यह भी पूछा, क्या उसने एलजी की अनुमति के आधार पर पेड़ों को काटने का फैसला किया था या कोई स्वतंत्र निर्णय भी किया गया था। पीठ ने कहा, जरूरत पड़ी तो हम एलजी को नोटिस जारी कर सकते हैं। ठेकेदार को भी नोटिस : पीठ ने पेड़ काटने वाले ठेकेदार को भी नोटिस जारी कर 31 जुलाई तक बताने को कहा कि किसके निर्देश पर उसने यह कार्रवाई की थी। 

दिल्ली सरकार भी 422 पेड़ काटने का दोष माने
पीठ ने कहा, दिल्ली सरकार को भी 422 पेड़ों को काटने की अवैध अनुमति देने का दोष स्वीकार करना चाहिए। सरकार को इस अदालत को बताना चाहिए कि वह पेड़ों की इस अवैध कटाई की भरपाई कैसे करेगी। 

  • न्यायालय ने यह भी नोट किया कि पेड़ों को काटने के प्रस्ताव को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी मंजूरी दे दी थी, जबकि उन्हें यह नहीं बताया गया था कि पहले न्यायालय से अनुमति की जरूरत है। पीठ ने वरिष्ठ वकील आदित्य सोंधी से पूछा, बताएं कि क्या सरकार सोच रही है कि उसके पास पेड़ों को काटने की अनुमति देने का अधिकार है?
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