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सुदीक्षा की मौतः पिता की थी चाय की दुकान, बेटी 3.80 करोड़ की स्कॉलरशिप पाकर कर रही थी यूएस में पढ़ाई

अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा Updated Tue, 11 Aug 2020 10:18 AM IST
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सुदीक्षा भाटी - फोटो : अमर उजाला

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बुलंदशहर के गांव चरौरा मुस्तफाबाद के निकट सोमवार सुबह दो बाइकों की आमने सामने भिड़ंत हो गई। हादसे में बाइक सवार एक छात्रा की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि, उसका भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजनों का आरोप है कि कुछ शोहदे अपनी बाइक से सुदीक्षा की बाइक के आगे-पीछे घूम-घूमकर उससे छेड़खानी कर रहे थे, जिसके बाद यह हादसा हुआ जिसमें सुदीक्षा की मौत हो गई।

सुदीक्षा एक साधारण परिवार से निकलकर शिक्षा के दम पर अमेरिका तक पहुंच गई थी। इसके चलते सुदीक्षा गांव और देश की अन्य लड़कियों को भी शिक्षित करना चाहती थी। वह अमेरिका के मसाचुसेट्स स्थित बॉबसन कॉलेज में करोड़ों की स्कॉलरशिप से बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थी। वहां की सरकार ने सुदीक्षा को 3.80 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप दी थी। सुदीक्षा ने बुलंदशहर के विद्याज्ञान स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की थी। उसने इंटर में 98 फीसदी अंक हासिल किए थे।



3.80 करोड़ की स्कॉलरशिप मिली थी
जब सुदीक्षा 12वीं में थी तो स्कूल में उच्च स्तर की पढ़ाई के लिए फॉर्म भरवाए गए थे। सुदीक्षा ने अमेरिकी सरकार से स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया था। उन्हें 3.80 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप मिली थी। सामान्य परिवार की छात्रा ने स्कॉलरशिप हासिल कर परिवार, क्षेत्र और समाज का नाम रोशन किया था। वह जुलाई, 2018 में अमेरिका गई थी। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने उनका सम्मान भी किया था।
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16 को लौटना था अमेरिका

कोरोना वायरस के कारण सुदीक्षा 14 मार्च को अमेरिका से भारत आ गई थी। तब से अपने घर पर ही थीं। 16 अगस्त को उसे वापस अमेरिका जाना था। सुदीक्षा के पिता की चाय की दुकान थी। फिलहाल परचून की दुकान है। वही परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। सुदीक्षा की तीन बहन और दो भाई हैं। वह सबसे बड़ी थीं। सभी को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह घर की जिम्मेदारी संभालेगी। तीन साल की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी, लेकिन सुदीक्षा की मौत ने परिवार के सपनों को चकनाचूर कर दिया। 

लड़कियों को शिक्षित करने का था सपना
सुदीक्षा एक साधारण परिवार से निकलकर शिक्षा के दम पर अमेरिका तक पहुंच गई थी। वह गांव और देश की अन्य लड़कियों को भी शिक्षित करना चाहती थी। यही कारण था कि अमेरिका से आने पर वह गांव की लड़कियों को पढ़ाती थी। परिजनों से कहती थी कि 20 साल की एक योजना बनाई है। एनजीओ बनाकर गांव और देश की लड़कियों को शिक्षित करने का काम करेगी। सुुदीक्षा का कहना था कि अगर लड़कियां शिक्षित हो जाएंगी तो देश की कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
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