राजधानी में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि जहांगीरपुरी, रोहिणी और शाहदरा इलाका सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल हैं। यह अध्ययन जलवायु-तकनीकी स्टार्टअप ‘रेस्पिरर लिविंग साइंसेज’ ने किया है, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और गूगल एयर व्यू+ के आंकड़ों का उपयोग किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहांगीरपुरी-बवाना-वजीरपुर कॉरिडोर में औसत पीएम2.5 का स्तर 140 से 146 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय सुरक्षित सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज से दो गुना से भी अधिक है।
अध्ययन के अनुसार, आनंद विहार और विवेक विहार में 133-135 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, जबकि रोहिणी 142 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, शाहदरा 134.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र 123.8 और मदनपुर खादर 120.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में भी खतरनाक स्तर पाया गया। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ये औद्योगिक और परिवहन-प्रधान इलाके लगातार प्रदूषण के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की अधिकता, भारी यातायात और शांत मौसम के कारण वायु में प्रदूषण फैल नहीं पाता।
द्वारका, लोधी रोड और श्री अरबिंदो मार्ग की हवा रही साफ
अध्ययन में पाया गया कि द्वारका, लोधी रोड और श्री अरबिंदो मार्ग जैसे क्षेत्रों में हवा अपेक्षाकृत साफ रही, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) संतोषजनक श्रेणी के करीब रहा। रिपोर्ट के अनुसार, 20 और 21 अक्तूबर को प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक रहा, जब पीएम2.5 का स्तर 675 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ऊपर पहुंच गया। यह दीपावली के आसपास की अवधि थी, जब त्योहारों और मौसम दोनों का असर देखने को मिला। रेस्पिरर लिविंग साइंसेज के संस्थापक और सीईओ रौनक सुतारिया ने कहा कि दिल्ली की प्रदूषण की समस्या अब सिर्फ शहर के केंद्र तक सीमित नहीं है। अब औद्योगिक और आवासीय क्षेत्र एक ही प्रदूषित वायु क्षेत्र में रह रहे हैं।
बेहद खराब श्रेणी में हवा बरकरार, प्रदूषण से राहत नहीं
राजधानी में हवा की दिशा बदलने से प्रदूषण में भले ही थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन जहरीली फिजा से लोंगों को राहत नहीं मिल रही है। सोमवार सुबह की शुरुआत धुंध और हल्के कोहरे से हुई। वहीं, आसमान में स्मॉग की चादर भी दिखाई दी। इस कारण दृश्यता भी कम रही। इस दौरान सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 382 दर्ज किया गया। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। इसमें रविवार की तुलना में 9 सूचकांक की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, एनसीआर में नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 397 दर्ज किया गया, यह बेहद खराब श्रेणी है। वहीं, गाजियाबाद में 396, ग्रेटर नोएडा में 382 और गुरुग्राम में 286 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 232 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाला प्रदूषण 20.45 फीसदी रहा। इसके अलावा, पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण 1.97, निर्माण गतिविधियां से होने वाला 3.10 और आवासीय इलाकों की भागीदारी 5.30 फीसदी रही।