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राजधानी: दिल्ली में आज से प्रदूषण पर सख्ती, नियम तोड़ने पर चालान और जब्ती; निर्माण गतिविधियों पर चरणबद्ध रोक

Sun, 01 Nov 2026 03:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

आज से नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों के चालान और जब्ती के साथ निर्माण स्थल बंद करने तथा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की कार्रवाई होगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए एक नवंबर से विशेष प्रतिबंध लागू होंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों के चालान और जब्ती के साथ निर्माण स्थल बंद करने तथा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की कार्रवाई होगी। सरकार ने पिछले छह महीने से इसकी तैयारी की है, लेकिन अब असली चुनौती 12 से अधिक विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय बनाकर प्रतिबंधों को जमीन पर लागू करने की है।

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एक नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-4 और पुराने वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। सीएनजी, इलेक्ट्रिक और अधिसूचित आपातकालीन वाहन इससे मुक्त होंगे। इसी अवधि में धूल फैलाने वाली बाहरी निर्माण और विध्वंस गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्धारित अपवादों को छोड़कर सभी निर्माण कार्य बंद रहेंगे। वहीं, 28 फरवरी तक पार्किंग शुल्क दोगुना और सरकारी व निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। शेष कर्मचारी घर से काम करेंगे।

कैमरों से पकड़े जाएंगे प्रतिबंधित वाहन
दिल्ली के प्रवेश मार्गों और प्रमुख स्थानों पर लगे स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरों से प्रतिबंधित वाहनों की पहचान कर चालान जारी किए जाएंगे। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें भी जांच करेंगी। उल्लंघन पर वाहन जब्त किए जा सकते हैं। एआई आधारित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) कैमरों से मिली सूचनाओं, चालान और निर्माण स्थलों पर कार्रवाई की निगरानी करेगा। शिकायत मिलने पर विशेष टीमें मौके पर पहुंचेंगी।
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वाहनों के अलावा धूल और कचरा भी बड़ी वजह
31 अक्तूबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 176 यानी मध्यम श्रेणी में रहा। हालांकि, 21 अक्तूबर को यह 244 तक पहुंच गया था। 27 अक्तूबर को 55 में से 27 निगरानी केंद्रों पर हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई। स्रोत विश्लेषण के मुताबिक, 27 अक्तूबर को प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी 21.3 प्रतिशत थी।

वाहनों के अलावा आवासीय गतिविधियां, उद्योग, निर्माण, कचरा जलाना और सड़क की धूल भी प्रदूषण बढ़ाते हैं। सर्दियों में हवा की रफ्तार घटने और तापमान गिरने से प्रदूषक जमीन के करीब जमा होने लगते हैं। आसपास के राज्यों से आने वाला पराली का धुआं भी मुश्किल बढ़ाता है। हालांकि, दो दिन की बारिश के बाद हवा की गुणवत्ता चार साल में सबसे बेहतर दर्ज की गई।

निगरानी और समन्वय की होगी परीक्षा
निर्माण स्थलों पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और नगर निगम की टीमें निरीक्षण करेंगी। प्रतिबंधित गतिविधियां मिलने पर काम बंद कराने के साथ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर स्थल सील भी होगा।

हालांकि, हजारों निर्माण स्थलों, सड़कों, बाजारों और वाहनों पर लगातार निगरानी बड़ी चुनौती है। कैमरे वाहनों की पहचान कर सकते हैं, लेकिन सड़क की धूल और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर रोक के लिए मैदानी अमले की सक्रियता जरूरी होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नागरिकों से निजी वाहनों का अनावश्यक इस्तेमाल घटाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और प्रतिबंधों का पालन करने की अपील की है।

एक दिन की राहत के बाद फिर बढ़ा प्रदूषण, एक्यूआई 117 पर पहुंचा
 राजधानी में साफ हवा की राहत ज्यादा दिन तक कायम नहीं रह सकी। शुक्रवार को संतोषजनक श्रेणी में पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शनिवार को फिर मध्यम श्रेणी में आ गया। शुक्रवार को दिल्ली का एक्यूआई 60 दर्ज किया गया था, जो शनिवार को बढ़कर 117 पहुंच गया। इस तरह महज 24 घंटे में एक्यूआई में 57 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।

शुक्रवार का एक्यूआई पिछले चार वर्षों में अक्तूबर महीने का सबसे कम स्तर था। इससे पहले 10 अक्तूबर 2022 को एक्यूआई 44 दर्ज किया गया था। हालांकि, अगले ही दिन प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को दिल्ली के 58 निगरानी केंद्रों में से 24 पर हवा संतोषजनक, 32 पर मध्यम और दो केंद्रों पर खराब श्रेणी में रही।
राजधानी में सबसे अधिक प्रदूषण जहांगीरपुरी में दर्ज किया गया। यहां एक्यूआई 243 रहा, जबकि पंजाबी बाग में 212 दर्ज किया गया। इन दोनों इलाकों में हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई। इससे स्पष्ट है कि दिल्ली का औसत एक्यूआई मध्यम श्रेणी में होने के बावजूद कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक रहा।

परिवहन क्षेत्र प्रदूषण का सबसे बड़ा स्थानीय स्रोत
निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) के आकलन के मुताबिक, शनिवार को दिल्ली के प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक 16.3 फीसदी रही। इसके अलावा आवासीय स्रोतों का योगदान 4.1 फीसदी, बाहरी क्षेत्रों के उद्योगों का 2.9 फीसदी, निर्माण गतिविधियों का 2.1 फीसदी और ऊर्जा क्षेत्र का 1.4 फीसदी आंका गया। अन्य स्रोतों की हिस्सेदारी एक फीसदी रही। वहीं, पराली जलाने से दिल्ली के प्रदूषण में 19.1 फीसदी योगदान का अनुमान लगाया गया। अन्य स्रोतों की हिस्सेदारी 18.3 फीसदी रही। एनसीआर के जिलों में गुरुग्राम का योगदान 6.5 फीसदी, झज्जर का पांच फीसदी, फरीदाबाद का 4.3 फीसदी और गौतमबुद्ध नगर का 3.7 फीसदी दर्ज किया गया।

अगले छह दिन भी राहत के आसार नहीं
वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के पूर्वानुमान के अनुसार, रविवार को दिल्ली की हवा मध्यम श्रेणी में रहने की संभावना है। हालांकि, इस दौरान एक्यूआई मध्यम से खराब श्रेणी के बीच भी रह सकता है। इसके बाद अगले छह दिनों तक राजधानी की हवा खराब से बहुत खराब श्रेणी में रहने का अनुमान है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदूषण से राहत मिलने की संभावना कम है।

दिल्ली-एनसीआर में 50 फीसदी कर्मचारी करेंगे वर्क फ्रॉम होम
सर्दियों में वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में एहतियाती कदम उठाए हैं। आयोग के आदेश के मुताबिक, 5 से 20 नवंबर तक दिल्ली और एनसीआर के चुनिंदा जिलों में सरकारी और निजी कार्यालयों में अधिकतम 50 फीसदी कर्मचारी ही काम के लिए बुलाए जा सकेंगे। शेष कर्मचारियों को घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करना होगा। इसके अलावा, धूल उड़ाने वाली निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर भी इस अवधि में रोक रहेगी।

आदेश के दायरे में दिल्ली के साथ हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत तथा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों के सभी संबंधित सरकारी और निजी कार्यालयों को कर्मचारियों की उपस्थिति 50 फीसदी तक सीमित रखनी होगी। हालांकि, ऐसी औद्योगिक इकाइयों और जरूरी सेवाओं को छूट दी गई है, जहां काम की प्रकृति के कारण घर से काम करना संभव नहीं है।

सड़क, फ्लाईओवर और पाइपलाइन निर्माण पर भी रोक
सीएक्यूएम ने निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए 5 से 20 नवंबर तक एनसीआर में बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ के काम बंद रखने का निर्देश दिया है। इस प्रतिबंध में हाईवे, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली की ट्रांसमिशन लाइन, पाइपलाइन और दूरसंचार से संबंधित निर्माण कार्य भी शामिल हैं। हालांकि, रेलवे, मेट्रो, हवाई अड्डे, अंतरराज्यीय बस अड्डे, अस्पताल, जलापूर्ति और स्वच्छता से जुड़ी परियोजनाओं को छूट दी गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं भी प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगी।

पिछले वर्षों के प्रदूषण स्तर को आधार बनाया
आयोग ने वर्ष 2018 से 2025 के बीच नवंबर में दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद यह फैसला लिया है। आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर के शुरुआती और मध्य दिनों में कई बार वायु गुणवत्ता गंभीर और गंभीर से भी खराब श्रेणी में पहुंची है। इस दौरान हवा की धीमी रफ्तार, प्रदूषकों के फैलाव के लिए प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां, पराली जलाने और स्थानीय स्तर पर होने वाले उत्सर्जन से प्रदूषण बढ़ता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए आयोग ने प्रदूषण के स्रोतों पर पहले से नियंत्रण लगाने का फैसला किया है। सीएक्यूएम ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की संबंधित राज्य सरकारों तथा विभागों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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