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जालसाजी: नोएडा से गोरखपुर तक यूपी के कई सीएमओ कार्यालय में बन रहे थे फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र, नौ गिरफ्तार

Fri, 09 Oct 2026 03:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

दिल्ली पुलिस की उत्तरी जिला पुलिस ने दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) श्रेणी के तहत दाखिले में मदद के लिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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demo - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के कई सीएमओ कार्यालयों में तैनात कर्मियों और उनके साथियों की मिलीभगत से फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाए जा रहे थे। दिल्ली पुलिस की उत्तरी जिला पुलिस ने दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) श्रेणी के तहत दाखिले में मदद के लिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से अब तक 27 फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र बरामद किए हैं।

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उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त निहारिका भट्ट ने बताया कि स्पेशल स्टाफ प्रभारी इंस्पेक्टर रोहित सारस्वत को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति पैसे लेकर जेबीटी, बीटेक और अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए छात्रों को फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाता है। जांच के बाद पुलिस ने अलीगढ़ निवासी और फिलहाल फरीदाबाद में रह रहे 36 वर्षीय ललित कुमार उर्फ आदित्य को 31 अगस्त को गिरफ्तार किया।

उसके कब्जे से उत्तर प्रदेश के बदायूं, बरेली और सिद्धार्थनगर के सरकारी अस्पतालों द्वारा जारी 16 दिव्यांगता प्रमाणपत्र, तीन मोबाइल और एक लैपटॉप बरामद हुआ। इन प्रमाणपत्रों में श्रवण बाधित, चलने-फिरने में असमर्थता और कम दृष्टि जैसी दिव्यांगताओं का उल्लेख था। इस संबंध में मौरिस नगर थाने में मामला दर्ज किया गया।
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नोएडा का रोशन कुमार जुटाता था जानकारी
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि पूछताछ में ललित ने खुलासा किया कि वह नोएडा के रोशन कुमार समेत कुछ शिक्षा सलाहकारों के साथ मिलकर छात्रों की निजी जानकारी जुटाता था और उनके लिए फर्जी प्रमाणपत्र बनवाता था। पुलिस के अनुसार, आधार कार्ड में दर्ज पते को एआई उपकरणों की मदद से बदलकर सिद्धार्थनगर, बदायूं, बरेली और गोरखपुर जैसे जिलों का पता दिखाया जाता था। इसके बाद यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) पोर्टल पर आवेदन देते थे। रोशन सेक्टर-18, नोएडा में रुद्र कंसल्टेंसी चलाता था।

20 से 30 हजार रुपये में बनाते थे फर्जी कागजात
उत्तरी जिला पुलिस के अनुसार, प्रत्येक फर्जी प्रमाणपत्र 20 हजार से 30 हजार रुपये में तैयार होता था। नोएडा के सेक्टर-18 में कंसल्टेंसी चलाने वाले रोशन कुमार को एक सितंबर को गिरफ्तार किया गया। वह छात्रों के आधार कार्ड का विवरण, फोटो, हस्ताक्षर और ओटीपी जुटाकर आवेदन प्रक्रिया के लिए ललित को देता था। बरेली के सीएमओ कार्यालय में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम करने वाले 28 वर्षीय कुलदीप को तीन सितंबर को गिरफ्तार किया। उसके मोबाइल फोन और एक डेस्कटॉप को जब्त किया। इनका इस्तेमाल फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर यूडीआईडी पोर्टल पर अपलोड करने में होता था।

मलेरिया इंस्पेक्टर को साथी समेत गिरफ्तार किया
उपायुक्त निहारिका भट्ट ने बताया कि बरेली दिव्यांग बोर्ड के सदस्य 60 वर्षीय डॉ. लक्ष्मी कांत सक्सेना और 40 वर्षीय शेर सिंह सोलंकी को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान आरोपियों के बीच वित्तीय लेनदेन का भी पता चला। सिद्धार्थनगर के दिव्यांग कार्यालय में तैनात वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक 48 वर्षीय जय प्रकाश शुक्ला को 10 सितंबर को गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने पैसे लेकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सिद्धार्थनगर के पते वाले फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने में मदद की। पुलिस के अनुसार, शुक्ला के परिचित 33 वर्षीय सुरेंद्र रस्तोगी को 19 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं को उसके बैंक खाते से कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला।

देवरिया के सीएमओ कार्यालय से भी गिरफ्तारी
सीतापुर निवासी 26 वर्षीय आदेश सिंह को 12 सितंबर को गिरफ्तार किया। उसके लखनऊ स्थित घर से नौ दिव्यांगता प्रमाणपत्र बरामद किए गए। वहीं, देवरिया के सीएमओ कार्यालय में कनिष्ठ सहायक 32 वर्षीय धीरेन्द्र कुमार पांडेय को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। उस पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर प्रत्येक प्रमाणपत्र पांच हजार रुपये में एक सहयोगी को देने का आरोप है।

दिल्ली पुलिस की जांच गोरखपुर तक पहुंची
पुलिस ने बताया कि गोरखपुर निवासी चंदन सिंह यादव की तलाश की जा रही है। उस पर गोरखपुर और देवरिया के सरकारी अस्पतालों में अपने संपर्कों के जरिये फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने में मदद करने का आरोप है। जांच में संबंधित अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों और उन छात्रों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिनके नाम पर ये प्रमाणपत्र जारी किए गए थे।

आरोपियों के पास बरामद सामान
पुलिस के अनुसार, 27 फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्रों के अलावा एक लैपटॉप, एक मैकबुक, एक डेस्कटॉप, प्रमाणपत्रों से संबंधित बातचीत वाले 11 मोबाइल फोन, 75 हजार रुपये नकद और एक मर्सिडीज कार बरामद की गई है।

कौन हैं आरोपी
ललित कुमार उर्फ आदित्य (36): गांव केशवपुर जोफरी, थाना लोहरा, जिला अलीगढ़ का निवासी। फिलहाल गांव जज्रू, फरीदाबाद, हरियाणा में रह रहा था।

कुलदीप (28): गांव तयातपुर, थाना बिथरी चैनपुर, जिला बरेली का निवासी। सीएमओ बरेली के दिव्यांग कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम करता था।
शेर सिंह सोलंकी (40): बदायूं निवासी। बरेली के दिव्यांगता बोर्ड का सदस्य।

डॉ. लक्ष्मी कांत सक्सेना (60): बरेली निवासी। बरेली के दिव्यांगता बोर्ड के सदस्य।
जय प्रकाश शुक्ला (48): गांव जिगिना शुक्ला, थाना त्रिलोकपुर, जिला सिद्धार्थनगर का निवासी। सिद्धार्थनगर में वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक और दिव्यांग कार्यालय में तैनात था।

आदेश सिंह (26): गांव केसरुआ, पोस्ट हरगांव, जिला सीतापुर का निवासी।
धीरेन्द्र कुमार पांडेय (32): देवरिया निवासी। सीएमओ कार्यालय, देवरिया में कनिष्ठ सहायक के पद पर तैनात था।

रोशन कुमार (34): हिमसागर अपार्टमेंट्स फेज-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्ध नगर का निवासी। नोएडा सेक्टर-18 में रुद्र कंसल्टेंसी नाम से एजुकेशनल कंसल्टेंसी चलाता था।
सुरेंद्र रस्तोगी (33): गांव मधुकरपुर, थाना नौगढ़, जिला सिद्धार्थनगर का निवासी।

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