गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पैनक्रिएटिक-बिलियरी साइंसेज के प्रोफेसर अनिल अरोड़ा ने बताया कि खाने की नली में बने 6.5 सीएम के ट्यूमर से खाने की नली में खाना अटक रहा था, जिस कारण रोगी को निगलने में परेशानी हो रही थी। मरीज की समस्या को देखते हुए एंडोस्कोपिक से इस ट्यूमर को हटाया गया जो देश के मेडिकल हिस्ट्री में सबसे बड़ा है।
अभी तक ऐसे ट्यूमर को बड़ा चीरा लगाकर हटाया जाता है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. शिवम खरे ने कहा कि इसे हटाने के लिए सबसे पहले ट्यूमर के आधार पर खारा इंजेक्ट किया, जिससे हमें ट्यूमर को उठाने में मदद मिली और चारों और एक टनल बनाई गई। उसके बाद इसे मुंह से सफलतापूर्वक निकाला गया और मरीज को दो दिनों के बाद छुट्टी दे दी गई।
डॉ. अनिल अरोड़ा ने कहा कि बड़े ट्यूमर को एंडोस्कोपिक तरीके से हटाना बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञ एंडोस्कोपिस्ट द्वारा तीन सेमी आकार तक के नियमित अंडाकार आकार के चिकने इसोफेजियल ट्यूमर को एंडोस्कोपिक रूप से हटाया जा सकता है, लेकिन यहां ट्यूमर छह सेमी से अधिक आकार में लोब्युलेटेड अनियमित नाशपाती के आकार का था। अनियमित आकार के कारण भोजन नली की सभी परतों से ट्यूमर को अलग करना मुश्किल हो जाता है।