दिल्ली से 50 किलोमीटर व साइबर सिटी गुरुग्राम से मात्र 25 किलोमीटर दूरी पर अरावली पर्वतमालाओं की तलहटी में स्थित सोहना कस्बा अपनी अद्भुत व प्राकृतिक मान्यताओं के कारण देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी विख्यात है। विश्व प्रसिद्धि के चलते हजारों की संख्या में पर्यटक प्रतिदिन इस पवित्र धरती पर कदम रखते हैं। कस्बे में करीब 800 वर्ष प्राचीन गंधकयुक्त गर्मजल सरोवर (कुंड) ने सोहना का नाम विश्व के मानचित्र पर अंकित कर दिया है।
बताया जाता है कि पूरे भारत वर्ष में इससे ज्यादा तापमान का गर्मजल अन्य किसी स्थान पर नहीं है। वर्तमान में गर्मजल सरोवर को तीर्थ स्थल के रूप में पहचाना जाता है। प्राकृतिक गंधकयुक्त गर्मजल के उद्गम व खोज को लेकर विभिन्न प्रकार की भ्रांतियां हैं। बताया जाता है कि विक्रमी सम्वत 1584 में चतुर्भुज नामक बंजारे ने गर्म पानी की खोज करके इस स्थान का नाम साखमजती महाराज रखा था।
सन 1900 में केशवानंद महाराज ने पवित्र सरोवर की गुम्बद पर अष्टधातु निर्मित कलश का निर्माण कराया था। सन 1938 में तीर्थस्थल(गरम कुंड) के स्वामित्व को लेकर सोहना कस्बे की हिन्दू व मुस्लिम जनता के मध्य विवाद हो गया था। मामला लाहौर हाइकोर्ट तक जा पहुंचा था। करीब 10 वर्षों तक चली अदालती जंग के पश्चात हाइकोर्ट ने मुगल सम्राट मोहम्मद जलालुद्दीन अकबर के दरबारी कवि अबुल फजल द्वारा रचित पुस्तक आईना-ए-अकबरी के तहत निर्णय हिंदुओं के पक्ष में दिया था।
क्या कहते हैं महंत
तीर्थ स्थल के महंत चमनपुरी गोस्वामी कहते हैं कि समोती अमावस्या व गंगास्नान पर्व पर मेले का आयोजन होता है। भक्तजन दूर दूर से स्नान व पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने तीर्थ स्थल को विकसित करने के लिए सहयोग प्रदान नहीं किया है।