दिल्ली उच्च न्यायालय ने हत्या के तीन मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा काट रहे सीरियल किलर चंद्रकांत झा को 90 दिन की पैरोल प्रदान कर दी। न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने कहा कि याचिकाकर्ता न्यायिक हिरासत में 15 साल और 6 महीने से अधिक समय बिता चुका है और उसे पिछले 3 वर्षों में रिहा नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का आचरण संतोषजनक है, उसे पांच बार पैरोल पर और सात बार फरलो पर रिहा किया गया है और ऐसा कोई आरोप नहीं है कि याचिकाकर्ता ने अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया हो।
याचिकाकर्ता ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302/201 के तहत आरोपों से जुड़ी कई एफआईआर के संबंध में 90 दिनों की पैरोल की मांग की थी। याचिकाकर्ता की ओर से वकील नेहा कपूर ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता की पैरोल को कई हत्या के मामलों में उनकी पिछली सजा के आधार पर अस्वीकार कर दिया गया था। हालांकि, यह बताया गया है कि आखिरी सजा दिए हुए दो साल से अधिक समय हो गया है और इस अवधि के दौरान याचिकाकर्ता का जेल आचरण संतोषजनक रहा है।
वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता को पहले पांच बार पैरोल पर और सात बार फर्लो पर रिहा किया जा चुका है। इसके अलावा याचिकाकर्ता की चार बेटियां हैं और उन्हें सबसे बड़ी बेटी के लिए एक उपयुक्त दूल्हे की तलाश करने की जरूरत है। ऐसे में उसे पैरोल पर रिहा किया जाए।
हालांकि सरकारी वकील ने पैरोल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के आपराधिक इतिहास और कई हत्याओं की सजा का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का आचरण कुल मिलाकर असंतोषजनक रहा है, और उनके द्वारा पैरोल का उल्लंघन करने की संभावना है।