दिल्ली के फॉरेंसिक मनोवैज्ञानिक मोहित बुट्टा का कहनाा है कि पीड़िता को चाकू घोंपने और स्लैब से कुचलने का कृत्य हमलावर के विनाशकारी इरादों को दिखाता है। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट वंदना वी प्रकाश ने कहा कि हमले की वीभत्सता हमलावर की हीन भावना और आत्मसम्मान की कमी को दर्शाती है। यह साजिशकर्ता के गुस्से, नफरत और आक्रोश के शांत होने तक पीड़ित पर वार करने की उसकी सनक को दर्शाती है।
राजस्थान में पॉक्सो परियोजना में शामिल फॉरेंसिक मनोवैज्ञानिक इंद्रनील भोवाल ने कहा कि गुस्से ने संकेत दिया कि पीडिता और अपराधी के बीच निजी संबंध थे। पुलिस अधिकारियों ने पूर्व में कहा था कि साहिल खान ने 28 मई की दोपहर को शराब पी थी और शाम को उसका साक्षी से सामना हुआ, जो अपनी सहेली के बच्चे की जन्मदिन पार्टी में जा रही थी।
भोवाल ने कहा कि कई शोधकर्ताओं ने पाया है कि किसी हत्या के मामले में कई बार चाकू घोंपा जाना इंगित करता है कि अपराध में व्यक्तिगत संबंध का तत्व शामिल है। उन्होंने कहा, कई बार चाकू घोंपने से यह भी पता चलता है कि क्रोध कुछ समय से जमा हो रहा था। भोवाल ने कहा कि हत्या से कुछ समय पहले उनके रिश्ते में कुछ ऐसा हुआ था, जिसने इसे बढ़ावा देने का काम किया और आरोपी को अपराध करने के लिए उकसाया।