मेयर शैली ओबरॉय ने शुक्रवार को सुबह करीब 11 बजे से स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव शुरू कराया। शाम को करीब तीन बजे तक शांतिपूर्वक चुनाव पूरा हुआ। दस मिनट ब्रेक के बाद मतों की गिनती शुरू हुई। चुनाव आयोग कार्यालय से आए कर्मचारियों और निगम सचिव कार्यालय के कर्मचारियों ने करीब दो घंटे में चुनाव के नतीजे तैयार किए और मेयर के सामने पेश किया। मेयर ने चुनाव के इस नतीजे पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।
मेयर शैली ओबरॉय ने कहा कि एक वोट इनवैलिड है, हम अवैध वोट के साथ इन नतीजों को नहीं मानेंगे। इसका भाजपा के पार्षदों ने विरोध करना शुरू कर दिया। पूर्व मेयर और भाजपा की मौजूदा पार्षद कमलजीत शेहरावत ने कहा कि मेयर शैली ओबरॉय को कोई हक नहीं है कि वह चुनाव आयोग और निगम सचिव कार्यालय की ओर से तय किए गए चुनाव के नतीजों को बदलें। लेकिन मेयर अपनी बात पर अड़ी रहीं। आखिरकार मेयर ने कहा कि हम फिर से वोटों की गिनती करवाएंगे। इस बात का भाजपा ने फिर से विरोध किया। भाजपा के पार्षदों ने कहा कि मेयर जिस मत को अवैध करार दे रही हैं, चुनाव अधिकारियों ने इसे वैध करार दिया है। हम चुनाव अधिकारियों के नतीजों पर अडिग रहेंगे।
आखिरकार मच गया बवाल
मेयर ने कहा कि जब दोबारा मतगणना नहीं हो पा रही तो वह अवैध मत को शामिल किए बिना अब चुनाव के नतीजे घोषित करेंगी। मेयर ने जैसे ही नतीजों का ऐलान करना शुरू किया और दो नाम पुकारे, उतने में भाजपा के पार्षद मेयर की कुर्सी की तरफ बढ़ गए। इनके साथ आम आदमी पार्टी के पार्षद भी मंच पर पहुंच गए। पुलिस ने मेयर को किसी प्रकार से वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। लेकिन आम आदमी पार्टी और भाजपा के पार्षद आपस में भिड़ गए। लात घूंसे चलने लगे, सदन में तोड़ फोड़ भी हुई। भाजपा का कहना है कि उनके करीब दस पार्षदों को गंभीर चोट आई है। उनका मेडिकल कराने के बाद एफआईआर किया जाएगा। पार्षद अमित कड़कड़ी, अशोक मानू जैसे कई अन्य सदस्यों को गंभीर चोट आई है। महिला पार्षद एक दूसरे को यह करते दिखीं कि 27 फरवरी को मिलो देख लेंगे। इसलिए मुश्किल लग रहा है कि सोमवार को भी शांतिपूर्वक स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव हो पाएगा।
बेबस नजर आए आयुक्त, निगम सचिव
सदन में लगातार चल रहे गतिरोध के दौरान निगम आयुक्त ज्ञानेश भारती और निगम सचिव भगवान सिंह बेबस नजर आए। भाजपा की पार्षद शिखा भारद्वाज ने कहा कि सदन में आप पार्टी की विधायक आतिशी और दुर्गेश पाठक बैठे रहे और मेयर उनके इशारे पर काम करती रहीं। वह अपनी मर्जी से एक भी फैसला नहीं ले पाईं। मेयर ने निगम आयुक्त और सचिव का सुझाव मानने से इंकार कर दिया। दोनों अधिकारी घंटों तक मुंह लटकाए, सर पर हाथ रखे बैठे रहे।
निगम सचिव भाजपा के एजेंट - दुर्गेश पाठक
आप विधायक व पार्टी के एमसीडी के प्रभारी दुर्गेश पाठक ने इस घटना के बाद निगम सचिव भगवान सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। विधायक ने कहा कि ऐसा लगता है कि निगम सचिव भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। जब भी उनसे सुरक्षा बंदोबस्त व सदन से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण विषयों पर बात की गई वह आनाकानी कर बात को टाल देते हैं।