दवा और खाना खाने के बाद भी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी है। इसकी बड़ी वजह महिलाओं में समय पर दवा, जांच और खान-पान को लेकर बरती जा रही लापरवाही है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के साथ महिला को नुकसान हो सकता है। इसका खुलासा लेडी हार्डिंग अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के एक शोध में हुआ है।
दरअसल, 2021 में विशेषज्ञों को पता चला है कि अस्पताल में इलाज करवाने वाली गैर-पंजीकृत महिलाओं में 80% और पंजीकृत में 40% तक एनीमिया के मामले मिले। इसकी तह तक जाने के विभाग के यूनिट-दो ने एक जून 2021 में एक शोध शुरू किया। इसमें हर महीने इलाज के पहुंचने वाली करीब एक हजार महिलाओं की जांच की गई। जांच के दौरान पता चला कि महिलाएं दवा और भोजन तो लेती है, लेकिन समय, तरीका और खुराक गलत है। वजह पता चलने के बाद विशेषज्ञों ने पंजीकृत महिलाओं की खुराक की पल-पल की निगरानी की गई। नतीजे बेहद उत्साहवर्धक रहे। इसमें एनीमिया के मामले घटकर 20% रह गए। इन सब में हल्का एनीमिया ही पाया गया।
शोध के दौरान की गई जांच
- हीमोग्लोबिन की जांच : पंजीकरण के दौरान, 28 और 36वें सप्ताह पर
- जांच में देखा गया कि महिलाएं 28 सप्ताह पर जांच नहीं करवाती। जबकि इस दौरान हीमोग्लोबिन दो जीएम/डीएल गिरता है। दूसरी जांच में खून की कमी का स्तर का पता चलता है और उसके आधार पर आयरन फोलिक एसिड दवा की खुराक दी जाती है।
- दवा लेते नहीं : ओपीडी में दवा न मिलने पर बाद में नियमित दवा नहीं खाते।
- दवा न समझना : शोध में पाया गया कि महिलाएं कैल्शियम और आयरन की दवा एक साथ लेती है, जबकि कैल्शियम की दवा खाना खाने के साथ और आयरन की दवा खाना खाने के कम से कम एक घंटे बाद लेनी चाहिए।
- दवा पूरी न खाना : शोध में पाया गया कि महिलाएं एक-एक माह की दवा ले जाती है। जबकि उनकी डोज अलग तरीके से निर्धारित होती है। ऐसे में गलत तरीके से दावा खाती हैं।
- खाने की अहमियत : महिलाओं को खाना व दवा के बारे में जानकारी नहीं होती।
डॉक्टर की सलाह माने तो नहीं रहेगी समस्या
शोध से जुड़ी विभाग की निदेशक प्रोफेसर डॉ. मंजू पुरी ने बताया कि महिलाएं यदि डॉक्टरों की बात को मानती है तो एनीमिया की समस्या नहीं होगी। इस शोध में भी महिलाओं में पाई कमी को दूर करते हुए उनपर निगरानी रखी गई।नियमित निगरानी से महिलाओं ने समय पर दवा और भोजन लिया जिसका फायदा दिखा।
शोध में मिला 70 फीसदी में बी12 का अभाव
शोध के दौरान लेडी हार्डिंग अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आने वाली 70 फीसदी गर्भवती महिला में आयरन फोलिक एसिड दवा लेने के बाद भी बी-12 की कमी देखी गई। इन महिलाओं को अस्पताल ने अपने तरफ से बी-12 की दवा देना शुरू किया।
केवल भोजन से दूर नहीं होता एनीमिया
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिला में केवल भोजन खाने से एनीमिया दूर नहीं हो सकता। गर्भावस्था में महिला के साथ बच्चे को भी पोषण की आवश्यकता होती है। शरीर भोजन से उक्त खुराक को जुटा नहीं पाता, ऐसे में अतिरिक्त जरूरत के लिए दवा दी जाती है।
गर्भवती की खुराक में जुड़े बी12
गर्भवती महिलाओं को योजना के तहत आयरन फोलिक एसिड की दवा दी जाती है। जबकि महिला रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इन दवा के साथ विटामिन-12 देना चाहिए। दुनियाभर के देशों में इसका चलन है। इसके अलावा जिंक, विटामिन डी सहित अन्य विटामिन की दवाओं को लेकर भी शोध चल रहा है। दवाओं की खुराक में इन्हें जोड़ने से गर्भवती महिलाओं के साथ उसके गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।