अयोध्या में बनाए जा रहे राम मंदिर में 22 जनवरी को होने वाले रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दिन राजधानी के निवासियों के घर दिवाली की तरह रोशनी से जगमग करने के लिए प्रजापति समाज के लोग दिन-रात दीये बनाने में लगे हुए हैं। दरअसल दीये लेने के लिए लोग उनसे संपर्क कर रहे हैं। इस कारण उन्होंने दीये तैयार करने के काम में परिजनों की भी मदद लेनी शुरू कर दी है। हालांकि राजधानी में अधिक ठंड होने के साथ-साथ लगातार धूप नहीं निकलने से दीये तैयार करने में दिक्कत भी हो रही है।
प्रजापति समाज के लोग आमतौर पर दिवाली के दौरान ही दीये बनाने के लिए चाक चलाते हैं, लेकिन अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के दिन 22 जनवरी को घरों में दीये जगानेे की अपील के मद्देनजर उन्होंने कई दिन से कड़ाके की सर्दी में दीये बनाने के लिए चाक चलाना आरंभ कर रखा है। वह दिवाली के समय एक दिन में करीब तीन हजार दीये बना लेते हैं, मगर अभी ठंड होने के कारण मुश्किल से दो हजार दीये ही बना पा रहे हैं। इसके अलावा उन्हें मिट्टी व काेयले की उपलब्धता की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल सर्दी में कोयले की मांग बढ़ जाती है। इस कारण उन्हें कोयला मांग के अनुसार नहीं मिल रहा, जबकि प्रतिदिन ठंड व कोहरा रहनेे के कारण उत्तर प्रदेश व हरियाणा से मिट्टी भी कम आ रही है। लगातार धूप नहीं निकलनेे से दीये सुखानेे में भी परेशानी हो रही है।
कुछ ही देर में ठिठुर जाते हैं हाथ
पहाड़गंज स्थित रामनाथ पटवा गली में वर्षों से मिट्टी के बर्तन बना रहे देवकरण प्रजापति ने बताया कि उनके पास 10 दिन से दीये खरीदने के लिए लोग संपर्क कर रहे हैं। इस कारण उन्होंने गत एक सप्ताह से दीये बनाने की शुरुआत की है, मगर ठंड अधिक होने पर सभी को दीयेे उपलब्ध कराना मुश्किल लग रहा है। वह प्रतिदिन दीये तैयार करने का कार्य पूरी क्षमता से नहीं कर पा रहे। लिहाजा रात में भी दीये बना रहे हैं। उधर नजफगढ़ स्थित धर्मपुरा में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले रामेहर प्रजापति ने बताया कि ठंड अधिक होने के कारण वह लगातार दीये नहीं बना पा रहे। मिट्टी तैयार करने के साथ-साथ दीये बनाते समय कुछ ही देर में हाथ ठिठुर जाते हैं। नांगलोई के बलजीत प्रजापति के अनुसार, लगातार धूप नहीं निकलने सेे दीये सूखने में काफी समय लेे रहे हैं।
राम भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। राम में रमने वाले साधकों ने भी अपने-अपने तरीके से इनको देखा-समझा है और मुझ जैसे लाखों-लाख लोगों ने भी। मेरे राम हर वक्त शांत रहते हैं। वह कभी गुस्सा नहीं होते। नफरत नहीं करते, कड़वाहट नहीं लाते। वह बगैर विचलित हुए घनघोर संकट का सामना करने की प्रेरणा देते हैं। राम के यही गुण पूजनीय हैं और यीशु के भी। ट्रेजडी से उनकी जिंदगी भी भरी थी। सूली पर चढ़ा दिया गया उनको, लेकिन तब भी उनका संदेश यही था कि इनको नहीं पता कि यह क्या कर रहे हैं। इनको माफ कर देना।
राम सबके लिए नजीर हैं। आपसी संबंधों में राम ने हर बार मानक तय किए। बात चाहे वह माता-पिता से संबंध निभाने की रही हो या भाई, पत्नी पुत्र दोस्त से। शत्रु तक से संबंध निभाने में राम के व्यवहार में विचलन नहीं है, तभी अमूमन हम आपसी बातचीत में एक-दूसरे को राम जैसा बनने की नसीहत देते हैं। हम भारतीय ही नहीं, इनकी खूबियों से पूरी दुनिया सीख ले सकती है और लेती भी है।
जेहन में राम का भाव आते ही एक विराट व शांत स्वरूप दिखता है। राम को जानने से ही जीवन राममय हो उठता है। भारतीय संस्कृति के लिए राम आदर्श हैं और इस आदर्श को हम सबने जाना तुलसी दास से है। इसमें बात जब राजा राम की आती है तो शासन का मानक भी उनके नाम से तय होता है। राम राज्य भी आदर्श हो जाता है। वह भी ऐसा, जो आम जन की शिक्षा, आय, स्वास्थ्य, जीवन प्रत्याशा का मानक सेट कर देती है।
(डॉ. अलका माइकल, प्रोफेसर, गार्गी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से बातचीत पर आधारित)
रामलला के दर्शन को सुलभ बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। उत्तर रेलवे की तरफ से अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के दिन 22 जनवरी से नियमित 20 आस्था स्पेशल ट्रेन चलाने की योजना बनाई है। ये ट्रेनें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड समेत व अन्य स्थानों से अयोध्या के लिए चलाई जाएंगी। आईआरसीटीसी को ट्रेनों के संचालन का जिम्मा दिया जाएगा। ट्रेनें में टिकट बुकिंग के साथ खानपान की सुविधा भी आईआरसीटीसी की ओर से किया जाएगा। ट्रेनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ और जीआरपी को दी गई है।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने अयोध्या के लिए रेलवे के किस जोन से कितनी ट्रेनें चलाई जाएंगी इसकी जानकारी मांगी थी। इस पर उत्तर रेलवे की ओर से 20 ट्रेनें चलाने का प्रस्ताव भेजा गया है। उत्तर रेलवे के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड समेत कई स्थान आते हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले राम भक्तों को अयोध्या जाने में कोई दिक्कत न हो इसके लिए आस्था स्पेशल नाम से ट्रेनें चलाई जाएंगी। यह ट्रेने 22 जनवरी से 15 अप्रैल तक चलाई जाएंगी।
लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में तेरे मेरे सबके राम विषय पर शृंखला शुरू होने के बाद यहां की दीवारों को जीवंत कैनवास में बदल दिया गया है। ये पारंपरिक चित्रकारी से सजी है। इसमें भगवान राम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को दर्शाया गया है, जो अयोध्या में राम मंदिर की भव्यता को सुशोभित कर रही हैं।
इसमें देश की विरासत में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रतिष्ठित नायकों की कहानियों को भी शामिल किया गया है। जिसमें स्वामी विवेकानन्द, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले, प्रसिद्ध तमिल कवि तिरुवल्लुवर व महात्मा गांधी जैसे महान लोगों की आकृति को उकेरा है।
लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. डॉ. प्रत्यूष वत्सला ने बताया कि तेरे, मेरे, सबके राम केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक टेपेस्ट्री की खोज और उसे सहेजने का उपक्रम है।