एसएफआई ने पीएचडी दाखिले में एसटी और एससी की सीटें कम रखने का दावा, पुन रोस्टर जारी करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पीएचडी दाखिला प्रॉस्पेक्टस 2026-27 में आरक्षण के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने दाखिला प्रक्रिया में तत्काल सुधार, आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करने और खाली बैकलॉग सीटें भरने की मांग की है। एसएफआई के मुताबिक कुल 711 सीटों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से करीब 53 सीटें होनी चाहिए थीं। लेकिन केवल 38 सीटें दिखाई गई हैं। संगठन ने 15 सीटों की कमी का दावा किया है। इसी तरह अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण के मुताबिक103 सीटें होने की बात कही गई है। जबकि इस श्रेणी में चार सीटों की कमी का आरोप है। दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) के लिए भी 5 प्रतिशत आरक्षण के मुकाबले केवल 17 सीटें दर्शाने का दावा किया गया है। एसएफआई के अनुसार संगठन की दिल्ली राज्य समिति की सदस्य और जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष गोपिका बाबू की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने संज्ञान लिया है। रिमाइंडर जारी कर विश्वविद्यालय से सात दिन में जवाब देने को कहा है। एसएफआई ने यह भी दावा किया कि उसकी पहल पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने भी शिकायत दर्ज की है।