यूपी के शो विंडो बन चुके नोएडा और ग्रेनो में पांच वर्ष में प्रापर्टी की कीमतों में 200 फीसदी तक उछाल आया है। पिछले पांच वर्ष में लांच हुई परियोजनाओं की कीमत आसमान पर पहुंच गई है। हालांकि आधे दशक में सबसे ज्यादा कीमतों में बढ़ोत्तरी होने वाले देश टॉप-10 शहरों में गुरुग्राम अव्वल है। यहां सबसे अधिक 260 फीसदी उछाल दर्ज किया गया है। सबसे कम कीमत मुंबई में बढ़ी है, यहां 37 फीसदी की बढ़त मिली है। हालांकि प्रति वर्गफीट कीमतों की बात करें तो मुंबई इस दृष्टि से सबसे महंगा है।
यहां औसत कीमत 35500 रुपये प्रति वर्गफीट है। इसके बाद गुरुग्राम में 19500 रुपये प्रति वर्ग फीट और नोएडा में 16 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट है। एक रियल एस्टेट फर्म के सर्वे आंकड़े के अनुसार वर्ष 2019 में औसतन 3810 रुपये प्रति वर्गफीट की कीमत पर ग्रेटर नोएडा में मिलने वाले घर की कीमत वर्ष 2024 में 8403 रुपये प्रति वर्गफीट तक पहुंच गई है। ऐसे ही नोएडा में पांच वर्ष पहले घर की औसत कीमत 6500 रुपये प्रति वर्गफीट तक थी, जो बढ़कर 16 हजार रुपये प्रति वर्गफीट तक पहुंच गई है।
गुरुग्राम में 2019 में हाउसिंग की औसत कीमतें 7500 रुपये प्रति वर्गफीट थी जो 2024 में बढ़कर 19500 रुपये प्रति वर्ग फीट पर पहुंच गई हैं। इसके पीछे बुनियादी सुविधाओं का विकास, एनआरआई की बढ़ती रूचि, हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल को बढ़ा कारण माना गया है। इसके अलावा स्टॉक मार्केट में मुनाफा हासिल करने वालों द्वारा रियल एस्टेट में निवेश और घर खरीदने की चाह के साथ ही लग्जरी घरों की ओर झुकाव ने कीमतों को उछाल दिया है।
आठ वर्ष में 17 फीसदी परियोजनाओं का रुका काम
कीमतों में उछाल का आलम उस दौर में है, जब यहां परियोजनाओं का काम तय समय पर पूरा नहीं हो पाया है। टियर-1 में ग्रेटर नोएडा में सबसे ज्यादा 74,645 यूनिटों का काम रुका हुआ है। पहले हुए सर्वे में पाया गया था कि ग्रेटर नोएडा में सबसे ज़्यादा 17 फीसदी यूनिटों का काम रूका हुआ है। इसमें 167 परियोजनाओं में 74,645 युनिटों का काम आठ वर्ष में पूरा नहीं पूरा नहीं हो पाया है।