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किताबों के नाम पर लूट रहे स्कूल, अभिभावकों ने की फीस नियतन कानून लागू कराने की मांग

Tue, 27 Mar 2018 11:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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नया सत्र शुरू होते ही अभिभावकों को बच्चों के दाखिले की चिंता सताने लगी है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधक अपने मन मुताबिक कीमत पर किताब और ड्रेस दे रहे हैं। अलग-अलग स्कूलों में एक ही क्लास की किताबों के दाम में काफी अंतर है। समरविल स्कूल में तीसरी कक्षा की किताब करीब 3300 रुपये की है, जबकि दूसरे स्कूल में यह करीब 5000 की। एपीजे स्कूल में केजी की किताब 4280 की है। 

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आरोप है कि स्कूल मन मुताबिक लेखकों की किताबें भी लगवा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि सभी स्कूल सीबीएसई बोर्ड के हैं। सभी में एक जैसी पढ़ाई हो रही है, तो किताबों के दाम में इतना अंतर क्यों। सेक्टर-22 में रहने वाले अभिभावक ने बताया कि उनका बेटा एपीजे स्कूल में केजी में है। उसकी किताब 4280 रुपये में आई है, जबकि तीसरी कक्षा में अन्य स्कूल में किताब के दाम 3300 रुपये हैं। 

स्टेशनरी के नाम पर काट रहे जेब
एक अभिभावक ने बताया कि उनका बेटा सेक्टर-27 स्थित कैंब्रिज स्कूल में पढ़ता है। दाखिले के दौरान स्टेशनरी के नाम पर 2000 रुपये लिए गए हैं। इसमें कलर, पेंसिल आदि शामिल हैं, लेकिन किताबें नहीं। अन्य चीजों के लिए अलग से चार्ज देना पड़ा है। 

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बदल देते हैं किताब

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधक हर साल किताब बदल देते हैं। अगर कोई बच्चा अगली क्लास में जाने पर दूसरे बच्चे को किताब देना चाहे तो भी नहीं दे सकता है। कुछ स्कूल सिलेबस में अतिरिक्त किताब जोड़ देते हैं। इससे में अभिभावकों को किताब खरीदनी ही पड़ती है।
 
दोगुने कीमत पर ड्रेस
स्कूलों की तरफ से किताबें के लिए परिसर में दुकानें शुरू कर दी गई हैं। उधर, ड्रेस के लिए अभिभावकों को कहा जा रहा है कि वो निर्धारित दुकान से ही ड्रेस खरीदें। जहां पर मार्केट की तुलना में दोगुनी रेट पर ड्रेस मिल रही है।

गाइड लाइन से भी ज्यादा किताबें
सीबीएसई ने हर क्लास केलिए किताबों की लिस्ट जारी की है, लेकिन इसके बावजूद स्कूल अपनी मर्जी के अनुसार किताब लगा रहे हैं। कई स्कूलों में वर्कबुक, डिक्शनरी आदि शामिल कर छह विषय के लिए किताबों की संख्या 13 से 14 तक कर दी गई है। इसके अलावा स्टेशनरी अलग से। 

गाइड लाइन अपनाएं स्कूल
नोएडा की सीबीएसई कोऑर्डिनेटर और एमिटी स्कूल की प्रिंसिपल रेणू सिंह ने बताया कि स्कूलों को सीबीएसई की गाइड लाइन के अनुसार ही किताबें लगवानी चाहिए। इसके अलावा अभिभावकों को टाइम टेबल के हिसाब से किताबें देकर बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए। आजकल बच्चों का बैग ज्यादा भारी होता है। ऊपर से किताबों के बोझ अलग। स्कूलों को भी इसका ध्यान रखना चाहिए। 
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अभिभावकों ने सौंपा ज्ञापन, जिलाधिकारी ने दिए निर्देश

फीस वृद्धि पर स्कूलों की मनमानी से नाराज अभिभावक सोमवार को सूरजपुर स्थित कार्यालय पर जिलाधिकारी बीएन सिंह से मिले। इस मौके पर शिक्षा अधिकार आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के जरिये प्रदेश शासन से फीस नियतन कानून बनाकर उसे लागू करने और स्कूलों की मनमानी रोकने की मांग की। जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक को स्कूलों की मनमानी रोकने के निर्देश दिए हैं। 

शिक्षा अधिकार आंदोलन के प्रवक्ता एके सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी से मिलकर समिति ने प्रदेश के निजी स्कूल संचालकों की मनमानी फीस वसूलने पर रोक लगाने के लिए स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क का विनियमन विधेयक 2017 को लागू करने, लागू नियमों को स्कूल प्रांगण के सार्वजनिक स्थान पर डिसप्ले करने, एनसीईआरटी पुस्तकों की स्कूल में महंगे दामों पर बेचने पर रोक और पुस्तकों को हर साल बदल देने पर रोक को लेकर ज्ञापन दिया।

जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक को ऐसे कालेजों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा डीआईओएस को स्कूलों पर नियमों को सख्त तरीके से लागू करने के लिए भी निर्देशित किया है। 
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