आर्थिक अपराध शाखा ने तेलंगाना विधानसभा चुनाव लड़ने वाले एक नेता को धोखाधड़ी कर करोड़ों रुपये का गबन करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी ने खुद को लौह अयस्क आपूर्तिकर्ता बताकर शिकायतकर्ता कंपनी से 6.57 करोड़ रुपये ले लिए और सामान की आपूर्ति नहीं की।
आरोप है कि उसने इस धनराशि का साल 2014 में विधानसभा चुनाव लड़ने में इस्तेमाल किया। आरोपी की गिरफ्तारी पर 50 हजार का नाम था। उसकी पहचान हैदराबाद निवासी सिद्धार्थ रेड्डी के रूप में हुई है।
साल 2013 में केयर प्रो बायोसाइंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक ने कालकाजी थाने में धोखाधड़ी और गबन की शिकायत की थी। उसने बताया कि कंपनी को चीन में 50 हजार मीट्रिक टन लौह अयस्क निर्यात करने का अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिला। कंंपनी इसके लिए व्यापारियों की तलाश कर रही थी। इस बीच आरोपी सिद्धार्थ रेड्डी ने संपर्क किया और लौह अयस्क की आपूर्ति करने का आश्वासन दिया।
आरोपी को कंपनी के साथ 60 लाख अमेरिकी डॉलर के अनुबंध और 12 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर बैंक गारंटी निष्पादित करनी थी, जो लेनदेन के पूरा होने तक वैध थी। आरोपी ने बताया कि लौह अयस्क खरीद लिया है और सारी सामग्री विजाग बंदरगाह के गोदाम में है। शिकायतकर्ता कंपनी ने आरोपी फर्म के बैंक खाते में कुल सहमत राशि 6.57 करोड़ रुपये स्थानांतरित कर दी।
शिकायतकर्ता ने विजाग (विशाखापत्तनम) से चीन में अपनी पार्टी के लिए लौह अयस्क की खेप ले जाने के लिए एक जहाज की व्यवस्था की, लेकिन आरोपी ने अपेक्षित कागजात प्रस्तुत नहीं किए।
जानबूझकर देरी के कारण जहाज को वापस जाना पड़ा। इससे कंपनी को 1.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कंपनी को चीनी खरीदार के पक्ष में जारी की गई 1.70 लाख अमेरिकी डॉलर की बैंक गारंटी का भी नुकसान हुआ। कुल मिलाकर आरोपी की वजह से कंपनी को नौ करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।
जांच में शामिल नहीं हुआ आरोपी
शाखा ने आरोपी को जांच में शामिल होने के लिए कहा, लेकिन वह शामिल नहीं हुआ और अपनी गिरफ्तारी से बचता रहा। साल 2021 में उसे अपराधी घोषित किया गया और उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार का इनाम रखा गया। एसीपी जटाशंकर मिश्रा के देखरेख में निरीक्षक अमित दहिया की टीम लगातार उसपर निगरानी रख रही थी और उसे लीला नगर, अमीरपेट, हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया।
लौह अयस्क के लिए कभी गोदाम ही नहीं लिया
पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि सिद्धार्थ रेड्डी ने शिकायतकर्ता से गलत तरीके से लौह अयस्क की खरीद के लिए भुगतान करवाया और अपने बैंक खाते में 6.57 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जबकि पैसा लौह अयस्क प्राप्त करने के लिए दिए गए थे। आरोपी कंपनी सिद्धार्थ इम्पेक्स के बैंक खाते की जांच में पता चला कि ट्रांसफर पैसे को नकद में निकाला गया। सीमा शुल्क आयुक्त पोर्ट एरिया विशाखापत्तनम के कार्यालय से सत्यापन करने पर पता चला कि आरोपी ने लौह अयस्क के भंडारण के लिए कभी कोई गोदाम बुक नहीं किया था।
धनराशि को चुनाव लड़ने में इस्तेमाल किया
सिद्धार्थ रेड्डी ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की और रेलवे ठेकेदार के रूप में अपना व्यवसाय शुरू किया। बाद में राजनीति में रुचि लेना शुरू कर दिया। हैदराबाद, रामगढ़ और विशाखापत्तनम में छोटे पैमाने पर लौह अयस्क का व्यापार भी करने लगा। उसने प्रोपराइटरशिप फर्म एम/एस सिद्धार्थ इम्पेक्स खोली और शिकायतकर्ता को लौह अयस्क की आपूर्ति का अनुबंध प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया और धोखा दिया। पूछताछ में खुलासा किया कि उसने धोखाधड़ी की रकम को साल 2014 में तेलंगाना में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए खर्च की थी, जहां वह उपविजेता रहा था।