कनाॅट प्लेस के बाबा खड़क सिंह मार्ग स्थित दिल्ली सरकार के भारती दिल्ली इंपोरियम का संचालन अब निजी एजेंसी के हाथ में देने की तैयारी है। दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) ने इंपोरियम के संचालन, बिक्री व्यवस्था और मैनपावर प्रबंधन के लिए कुछ शर्तों के साथ निविदा आमंत्रित की है। चयनित एजेंसी को हर साल सरकार को कम से कम चार करोड़ रुपये की बिक्री आमदनी देनी होगी।
स्टेट इंपोरिया बिल्डिंग में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और मेजेनाइन फ्लोर को मिलाकर इंपोरियम करीब सात हजार वर्गफुट क्षेत्र में है। निविदा के मुताबिक निजी एजेंसी को तीन साल के लिए संचालन सौंपा जाएगा। प्रदर्शन के आधार पर अनुबंध दो साल और बढ़ाया जा सकता है। एजेंसी के लिए न्यूनतम सालाना बिक्री लक्ष्य चार करोड़ रुपये रखा गया है और हर साल इस लक्ष्य में पांच फीसदी की स्वतः बढ़ोतरी होगी। इस तरह एजेंसी पर बिक्री बढ़ाने का दबाव लगातार बना रहेगा।
कनाॅट प्लेस के मौजूदा परिसर में 1975 में भारती दिल्ली एम्पोरियम की स्थापना हुई थी। डीएसआईआईडीसी को इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई। तीन मंजिलों में विकसित इस एम्पोरियम में साड़ियों, कपड़ों, कालीन, शॉल, पीतल के सामान, हथकरघा उत्पाद, चमड़े की वस्तुएं, पेंटिंग, लकड़ी की नक्काशी, जरदोजी, परिधान, संगमरमर की कलाकृतियां, सफेद धातु और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद उपलब्ध हैं। यहां कुल 19 श्रेणियों के उत्पाद प्रदर्शित और बिक्री के लिए रखे जाते हैं।
40 फीसदी प्राइम स्पेस होगा कॉमर्शियल इस्तेमाल
इंपोरियम की जगह को लेकर भी निविदा में महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। कुल क्षेत्रफल के 60 फीसदी हिस्से को हस्तशिल्प से जुड़ी गतिविधियों के लिए निर्धारित रखा गया है, जबकि 40 फीसदी जगह का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे इंपोरियम में कारोबार और बिक्री बढ़ाने की गुंजाइश बनेगी, जबकि कारीगरों और हस्तशिल्प उत्पादों के लिए निर्धारित हिस्सा सुरक्षित रहेगा। सरकार के मुताबिक हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े अवार्डी कलाकारों के लिए 10 फीसदी विशेष स्थान निर्धारित रहेगा। यानी निजी एजेंसी को संचालन सौंपे जाने के बावजूद इंपोरियम की मूल पहचान हस्तशिल्प और कारीगरों से जुड़ी रखने का प्रावधान किया गया है।
स्टाफ से सुरक्षा तक निजी एजेंसी की जिम्मेदारी
निजी एजेंसी को बिक्री कर्मचारियों, कैशियर, अकाउंटेंट और सुरक्षा गार्डों की तैनाती अपने खर्च पर करनी होगी। कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन, ईएसआई और पीएफ समेत सभी वैधानिक जिम्मेदारियां भी एजेंसी की होंगी। मतलब डीएसआईआईडीसी पर रोजमर्रा के संचालन और मैनपावर प्रबंधन का बोझ नहीं रहेगा। लेकिन निजी संचालन के बावजूद बिक्री से मिलने वाली पूरी रकम सीधे डीएसआईआईडीसी के बैंक खाते में जमा होगी। इसके बाद निगम एजेंसी को बिक्री के आधार पर तय राशि का भुगतान करेगा।
मालिकाना नहीं, संचालन होगा निजी
सरकार की ओर से साफ किया गया है कि इंपोरियम को निजी हाथों में देने का मतलब इसका स्वामित्व निजी कंपनी को सौंपना नहीं है। प्रस्ताव के मुताबिक संचालन, बिक्री और मैनपावर प्रबंधन निजी एजेंसी को दिया जाएगा।