नई दिल्ली। जिला अदालत ने गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) रद्द कराने की मांग वाली याचिका को शरारतपूर्ण याचिका करार देते हुए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि न्याय तक उदार पहुंच को अराजकता और अनुशासनहीनता का साधन नहीं समझा जाना चाहिए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपिंदर सिंह ने चेक बाउंस मामले में याचिकाकर्ता सौम्या रंजन कानूनगो के खिलाफ एनबीडब्ल्यू को रद्द करने से इनकार करने वाले मजिस्ट्रेट के अगस्त 2024 के आदेश के खिलाफ दायर संशोधन याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट का आदेश कनूनगो के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता, क्योंकि एनबीडब्ल्यू केवल उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया था। कोर्ट ने नोट किया कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के बजाय, याचिकाकर्ता ने इस संशोधन याचिका को दायर करके न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी याचिका को भारी जुर्माने के साथ दंडित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा, ट्रायल कोर्ट ने ठीक ही देखा कि याचिकाकर्ता ने दी गई छूट का अनुचित लाभ उठाया। उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए लगातार एनबीडब्ल्यू जारी किए गए, क्योंकि उनकी अनुपस्थिति में पांच साल से अधिक समय तक मुकदमा एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सका। ब्यूरो