निजामुद्दीन मरकज से निकाले गए लोग
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निजामुद्दीन स्थित मरकज में आयोजित तब्लीगी जमात से पकड़कर क्वारंटीन सेंटर में रखे गए 916 विदेशी जमातियों की रिहाई के लिए हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। आरोप लगाया गया है कि क्वारंटीन सेंटरों में कोरोना टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद विदेशी जमातियों को गैर कानूनी ढंग से क्वारंटीन सेंटरों में रखा गया है।
यह याचिका अलग-अलग 20 याचिकाकर्ताओं ने वकील अशीमा मंडला के जरिए दायर की है। याचिका में वकील ने कहा है कि दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग ने 9 मई को 567 विदेशी नागरिकों को दिल्ली पुलिस को सौंपने का आदेश दिया था। इन नागरिकों की एकांतवास की अवधि पूरी हो चुकी है। इन्हें दिल्ली पुलिस को सौंपने का दिल्ली सरकार का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 21 एवं 22 का उल्लंघन है। याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि रमजान का महीना चल रहा है और ईद नजदीक है। ऐसे में विदेशी नागरिकों को आइसोलेशन में रखना उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
पुलिस की एफआईआर में 567 विदेशी नागरिकों के बारे में यह नहीं बताया गया है कि क्या ये कभी ब्लैक लिस्टेड हुए हैं या कभी उन्हें पुलिस अधिकारियों ने पकड़ा है। किसी व्यक्ति को जांच के लिए हिरासत में रखना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए इन विदेशी नागरिकों को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया जाए। याचिकाओं में कहा गया कि क्वारंटीन सेंटरों में बंद 916 विदेशी नागरिकों को जल्द रिहा किया जाए। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में एक अन्य याचिका पर 15 मई को सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने कहा था कि तब्लीगी जमात के जिन लोगों का एकांतवास पूरा हो चुका है, उन्हें रिहा कर दिया गया है। उसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली थी।