- प्रतिवादियों को कानूनी प्रक्रिया के बिना शिकायतकर्ता को बेदखल करने से रोका जाता है : अदालत
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम के एक मामले में एक विधवा को अपने नाबालिग बच्चे के साथ ससुराल में रहने की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि यह घर उसके पति के जीवित रहते हुए उसके ससुराल वालों और महिला के साथ साझा किया जाता था। उसके पति की नवंबर 2015 में मृत्यु हो गई। शिकायतकर्ता को कथित तौर पर 2018 में ससुराल से निकाल दिया गया था। शिकायतकर्ता ने ससुराल वालों पर शारीरिक उत्पीड़न और दहेज की मांग का आरोप लगाया है। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनिका ने कहा कि प्रतिवादियों को कानूनी प्रक्रिया के बिना शिकायतकर्ता को बेदखल करने से रोका जाता है। हालांकि, अदालत ने उसके पति और अन्य ससुराल वालों के संयुक्त स्वामित्व वाली किसी भी संपत्ति या व्यवसाय की अनुपस्थिति में उसके ससुराल वालों से भरण-पोषण देने से इन्कार कर दिया है।