अंतर करना मुश्किल डॉ. सुभाष गिरी
जीटीबी अस्पताल के निदेशक डॉ. सुभाष गिरी ने कहा कि कोविड व मौसमी बीमारी में अंतर करना मुश्किल है। कोविड में बुखार ज्यादा समय तक रहता है, जबकि सामान्य वायरल का बुखार कम। ऐसे में यदि किसी को भी बुखार, खांसी, जुकाम होता है तो उन्हें खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए। इससे जहां कोरोना का प्रसार रुकेगा, वहीं वायरल भी दूसरे तक नहीं पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि उम्मीद कर रहे हैं कि 15 जनवरी तक मौसमी बीमारी के मामले घटेंगे। वहीं, विश्व स्तर पर कोरोना के नए वेरिएंट के मामलों में भी कमी आएगी। ऐसे समय में बचाव के लिए लोगों को पौष्टिक आहार लेना चाहिए। इस समय इम्युनिटी को मजबूत रखना बहुत जरूरी है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि भारत में कोरोना के नए वेरिएंट का ज्यादा गंभीर असर नहीं होगा।
11 जिलों में उपलब्ध नहीं है मुफ्त वैक्सीन की स्लॉट
दिल्ली के 11 जिलों में 29 दिसंबर तक मुफ्त कोविड वैक्सीनेशन के लिए कोई स्लॉट उपलब्ध नहीं है। कोविन एप के अनुसार उत्तर दिल्ली के जिले के स्वरूप नगर में देर शाम तक केवल 29 दिसंबर के लिए कुछ स्लॉट उपलब्ध थे, जबकि मध्य, पूर्वी, उत्तर-पूर्वी, उत्तर-पश्चिमी, शाहदरा, दक्षिणी, दक्षिण-पूर्वी, दक्षिण-पश्चिमी और पश्चिमी दिल्ली जिले के किसी भी सेंटर पर मुफ्त में वैक्सीन के लिए कोई स्लॉट उपलब्ध नहीं है। हालांकि अधिकतर जिले में भुगतान के साथ स्लॉट उपलब्ध थे।
बचाव के लिए कराएं वैक्सीनेशन: डॉ. सुरेश
लोकनायक अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि कोरोना के नए वेरिएंट से बचाव के लिए वैक्सीनेशन करवाना जरूरी है। जिन्होंने अभी तक बूस्टर डोज नहीं लगवाई है उन्हें आगे आकर वैक्सीन लगवाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव के बाद से तेजी से वायरल व अन्य के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें कोरोना के संदिग्ध मरीज भी हो सकते हैं, यदि वैक्सीन लगी होगी तो बचाव आसान होगा। वहीं हाई रिस्क के मरीजों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। इनमें हार्ट, सांस, टीबी, कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारी के मरीज शामिल हैं।