प्रगति मैदान के विश्व पुस्तक मेले में इस साल पाकिस्तान के आने पर संशय बरकार है। मेला आयोजक नेशनल बुक ट्रस्ट के पास अभी पाकिस्तानी प्र्रकाशकों ने पुष्टि नहीं की है। इसकी वजह वीजा आदि से जुड़ी औपचारिकताओं का पूरी न हो पाना बताया जा रहा है।
दूसरी तरफ देश-विदेश के करीब 1000 प्रकाशकों के साथ देश का सबसे बड़ा पुस्तक मेले का आगाज आगामी शनिवार से हो रहा है। इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑरगेनाइजेशन (आईटीपीओ) मेले का सहयोगी है।
9-17 जनवरी के बीच पुस्तक प्रेमी अपनी पसंद की पुस्तकों से रूबरू होंगे। विश्व पुस्तक मेले की थीम महिला लेखन रखी गयी है। आयोजक मानते हैं कि इससे बड़े पैमाने पर महिला लेखकों की पुस्तकें मेले में मिलेंगी।
वहीं, जनवरी महीने में मेले के आयोजित करने के बारे आयोजक बताते हैं कि परीक्षा की तैयारियों की व्यस्तता होने से फरवरी के आयोजन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल नहीं हो पा रहे थे।
उनकी सहूलियत को ध्यान में रखते हुये बीते साल की तरह इस बार भी जनवरी में मेला लग रहा है। खास बात यह कि 9 दिवसीय मेले में दो वीकेंड होंगे। इससे बड़ी संख्या में लोगों के मेले में पहुंचने की उम्मीद है।
मेले में विदेशी भागीदारों के बारे में आयोजकों का कहना है कि अभी तक 25 देशों के प्रकाशकों की मेले में आने की सहमति मिली है। इसमें कोई पाकिस्तानी प्रकाशक शामिल नहीं है।
इसकी वजह है कि सुरक्षा कारणों से अभी वीजा आदि से जुड़ी औपचारिकतायें पूरी नहीं हो सकी हैं। हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी ने उम्मीद जताई कि मेले शुरू होने में अभी चार दिन बाकी हैं। संभव है कि कुछ पाकिस्तानी प्रकाशकों की मेले में आने की सहमति मिल जाये।
9-17 के बीच चलने वाले किताबों के महाकुंभ में दर्शकों की सहूलियत का ध्यान रखा गया है। इसके लिये दिल्ली मेट्रो के 50 स्टेशन के साथ प्रगति मैदान के काउंटर पर टिकट मिलेगा। हॉल नंबर 6, 7, 8, 9, 10, 11, 18 हॉल नंबर 12 व 12 ए में पुस्तक प्रेमियों को पुस्तकें मिलेंगी।