दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को एतिहासिक तुगलकाबाद किले से चार सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले में केवल मूक दर्शक नहीं बने रह सकते हैं। यह कहते हुए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई को तय की है।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए तुगलकाबाद किले में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के खिलाफ दलीलें देते हुए एएसआई के निदेशक सहित शीर्ष अधिकारियों समेत संबंधित विभागों और एजेंसियों को व्यक्तिगत मौजूदगी का आदेश दिया। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने किले से अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया था। एएसआई ने पहले ही 1248 संरचनाओं पर नोटिस चिपकाए हैं। एएसआई को अतिक्रमण हटाने का निर्देश देते हुए एसडीएम व एमसीडी सभी को जरूरी उपकरण और मशीनें मुहैया कर इसमें साथ देंगी। एएसआई ने अदालत के समक्ष अतिक्रमण को हटाने में अपनी बेबसी जाहिर की थी।
अधिकारियों की तरफ से असहयोग के कारण अवैध निर्माण नहीं हटाए जा सके। अदालत ने एमसीडी और एसडीएम के अलावा दिल्ली पुलिस को भी यह आदेश दिया अतिक्रमण हटाने में एएसआई को जरूरी सहयोग दें। इसका पालन नहीं करने पर संबंधित विभागों या एजेंसी के अधिकारी को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश देगा।
उच्च न्यायालय ने पिछले साल 24 नवंबर को तुगलकाबाद किला और उसके आसपास से अतिक्रमण हटाने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था। उस वक्त एएसआई के अधिवक्ता ने इसे हटाने में असमर्थता जताई थी। एतिहासिक किले की रक्षा, रखरखाव और संरक्षण के लिए 2001 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय को इन पहलुओं पर नजर रखने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने फरवरी 2016 में पूरे तुगलकाबाद किले को संरक्षित क्षेत्र घोषित करते हुए एएसआई को निर्देश दिया कि वह किसी भी भूमि को हड़पने या अतिक्रमण नहीं करने दे।