किसी मामले में सह-आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी होनी है, केवल इस आधार पर अन्य आरोपी को हमेशा जेल में नहीं रख सकते। अदालत ने यह टिप्पणी दिल्ली दंगा मामले में दो आरोपियों को जमानत प्रदान करते हुए की। यह मामला चांदबाग इलाके में 24 फरवरी को किसी भाई साहब नामक शख्स को दंगाइयों द्वारा हमला कर जख्मी करने से जुड़ा है।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने आरोपी जावेद तथा गुलफाम को जमानत देते हुए कहा कि मामले की जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। केस की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लगेगा। मामले में अन्य आरोपियों की पहचान तथा गिरफ्तारी होनी है, केवल इस आधार पर आरोपियों को हमेशा जेल में नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने आरोपियों को जमानत प्रदान करते हुए कहा कि आरोपियों का नाम एफआईआर में नहीं है और उनके खिलाफ कोई स्पष्ट आरोप नहीं है। अदालत ने 20-20 हजार के निजी तथा इतनी ही राशि के मुचलके पर जमानत प्रदान की है। दिल्ली पुलिस ने जावेद को मई तथा गुलफाम को जुलाई में गिरफ्तार किया था।
कोर्ट के समक्ष वर्चुअल सुनवाई में आरोपी गुलफाम के वकील ने कहा कि वह डीयू का छात्र है और कानूनी रूप से वैध साक्ष्य उसके खिलाफ नहीं है। वह दंगों के किसी भी सीसीटीवी फुटेज में नहीं है और केस की एफआईआर दर्ज करने में पुलिस ने भारी विलंब किया है।