नई दिल्ली। एलटीजी ऑडिटोरियम में हम हैं थिएटर्स की प्रस्तुति में एक टिकट पर दो नाटकों ने दर्शकों को अलग-अलग दौर और विचारों की यात्रा कराई। निर्देशक अरुण प्रभु के ‘1943: एक लोटा कहानी’ ने प्रेम और विचारधारा के टकराव को प्रभावी ढंग से दिखाया। इसमें लालित गेरा, अदिति चौधरी और आशीष जैन सहित कलाकारों ने उस दौर की सामाजिक जटिलताओं को जीवंत कर दिया। वहीं ‘दृष्टि कौन’ ने हास्य के जरिए नजरिए की अहमियत को उजागर किया। दोनों नाटकों ने जीवन को देखने के दृष्टिकोण पर गहरा संदेश दिया। संवाद