सीएम विंडो पर शिकायत आने के बाद गठित की गई थी जांच समिति
5.40 लाख रुपये की रिकवरी की सिफारिश
दिनेश देशवाल
नूंह। अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर (यू-एएएम) सेंटर के लिए निजी भवन किराये पर लेने के मामले में गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत फिरोजपुर झिरका में इस सेंटर का संचालन हो रहा है जिसका केवल किराया देने का आरोप है। सीएम विंडो पर दर्ज शिकायत करने के बाद गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में सूचना सहायक, डिप्टी सिविल सर्जन और तत्कालीन दो सिविल सर्जनों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा लगभग 5.40 लाख रुपये की सरकारी राशि की रिकवरी करने की सिफारिश की है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मामला 2024 से मार्च 2026 तक का है। आरोप है कि जिस भवन को यू-एएएम सेंटर के लिए किराये पर लिया गया, वह करीब 27 माह तक पूरी तरह बंद और गैर-कार्यशील रहा, वहां न तो स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हुईं और न ही कोई कर्मचारी तैनात किया गया। इसके बावजूद हर महीने लगभग 20 हजार रुपये किराया एनएचएम खाते से जारी किया जाता रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएचएम के सूचना सहायक वसीम अकरम ने अपनी मां के स्वामित्व वाले भवन को किराये पर दिलाने की प्रक्रिया में हितों के टकराव की जानकारी विभाग से छिपाई। जांच समिति के अनुसार उन्होंने किरायानामा पर गवाह के रूप में हस्ताक्षर भी किए और विभाग को यह नहीं बताया कि भवन उनकी मां का है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उनकी मां ही एकमात्र आवेदक थी, जिससे पूरी निविदा प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं।
सीएमओ की घोर लापरवाही : जांच में तत्कालीन सिविल सर्जन (सीएमओ) डॉ. राजीव बतीश पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने स्थानीय एसएमओ को प्रक्रिया से अलग रखते हुए भवन चयन समिति की अध्यक्षता की और बिना पर्याप्त सत्यापन के एक वर्ष का प्रारंभिक किरायानामा स्वीकृत किया। इसके बाद तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सर्वजीत कुमार ने भवन के उपयोग में न होने की जानकारी होने के बावजूद पहले एक वर्ष और फिर तीन माह का लीज विस्तार स्वीकृत किया। रिपोर्ट में डिप्टी सिविल सर्जन (एनएचएम) डॉ. विशाल सिंगला की भूमिका भी गंभीर बताई गई है। जांच समिति के अनुसार उन्होंने भवन का भौतिक सत्यापन नहीं कराया और 2025 में स्थानीय एसएमओ द्वारा भेजी गई उस लिखित रिपोर्ट की भी अनदेखी की, जिसमें स्पष्ट कहा गया था कि भवन में कोई स्वास्थ्य गतिविधि नहीं चल रही और वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है। इसके बावजूद मासिक किराये के बिलों पर संयुक्त हस्ताक्षर कर भुगतान जारी रखा गया।
जांच समिति ने संवेदनशील प्रशासनिक एवं खरीद संबंधी कार्यों से स्थायी रूप से हटाने की भी अनुशंसा की
जांच समिति ने अपनी अंतिम सिफारिशों में वसीम अकरम के विरुद्ध गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई, संवेदनशील प्रशासनिक एवं खरीद संबंधी कार्यों से स्थायी रूप से हटाने तथा डॉ. विशाल सिंगला के खिलाफ वित्तीय अनियमितता और लापरवाही के आरोपों में कार्रवाई की अनुशंसा की है। साथ ही तत्कालीन सिविल सर्जनों डॉ. राजीव बतीश और डॉ. सर्वजीत कुमार के विरुद्ध विस्तृत रिपोर्ट महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) को भेजकर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है। समिति ने लगभग 5.4 लाख रुपये की सरकारी राशि संबंधित पक्षों से संयुक्त रूप से वसूलने की भी अनुशंसा की है।
रिपोर्ट पर अपनी टिप्पणी में वर्तमान सिविल सर्जन ने लिखा है कि जांच रिपोर्ट से वसीम अकरम के विरुद्ध प्रथमदृष्टया प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं का मामला बनता है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तथा नियमानुसार रिकवरी की जा सकती है। वहीं, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों डॉ. राजीव बतीश, डॉ. सर्वजीत कुमार और डॉ. विशाल सिंगला के बयान जांच में दर्ज नहीं किए गए, इसलिए उनके संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती। सिविल सर्जन ने अपनी टिप्पणी में यह भी लिखा कि वसीम अकरम के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोपों के चलते उनसे सभी चार्ज वापस ले लिए गए है। जांच समिति में शामिल सीएम विंडो के एमीनेंट पर्सन नितिन दूबे ने कहा कि जिले में इस प्रकार के चार केंद्र चल रहे है, जो सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। इन केंद्रों को लेकर बडे़ गबन व लापरवाही की सूचनाएं थी। जिस पर जांच की गई है, इसमें जिले के स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई है। इन सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, इसके लिए सरकार के संज्ञान में यह मामला भेज दिया गया है।
जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है, जिसमें संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाने की सिफारिश की गई है। वहीं, 5.40 लाख रुपये की रिकवरी के लिए भी सिफारिश की गई है। - डॉ ज्योत्सना, सीएमओ